जरुरी जानकारी | सरकार ने इस्पात कंपनियों को लॉजिस्टिक्स लागत घटाने का भरोसा दिया

नयी दिल्ली, एक जुलाई सरकार ने बुधवार को इस्पात निर्माताओं को भरोसा दिया कि वह उन उत्पादों की लॉजिस्टिक लागत को कम करने के लिए उचित कदम उठाएगी, जो वर्तमान में 28 फीसदी तक पहुंच गई हैं।

‘भारतीय लौह और इस्पात उद्योग के लिए सहायक लॉजिस्टिक्स’ विषय पर फिक्की द्वारा आयोजित एक वेबिनार में इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि लॉजिस्टिक्स की उच्च लगात मंत्रालय के लिए चिंता का विषय है।

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उन्होंने कच्चे माल की लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने के लिए सभी हितधारकों से सुझाव भी मांगे और भरोसा दिया कि मंत्रालय इन सुझावों के अनुसार कदम उठाएगा।

कुलस्ते ने कहा कि भारत ने 2030 तक 25.5 करोड़ टन इस्पात उत्पादन करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए खदानों से लेकर अंतिम छोर पर स्थित ग्राहक तक लगभग 80-85 करोड़ टन कच्चे माल पहुंचाने की जरूरत होगी और उसके लिए लॉजिस्टिक्स व नियादी ढांचे की जरूरत भी होगी।

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भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने पहले ही लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सागरमाला, भारतमाला और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे मेगा प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है।

मंत्री ने कहा कि इस समय इस्पात बनाने के लिए प्रमुख कच्चे माल लौह अयस्क की परिवहन लागत रेल के माध्यम से प्रत्येक 250 किलोमीटर के लिए 800 रुपये से 1,000 रुपये प्रति टन है।

उन्होंने कहा कि यह लागत सड़क के माध्यम से 2,000 रुपये से 2,500 रुपये के बीच आती है, जबकि जलमार्ग से लागत 450-550 रुपये के आसपास है और स्लरी पाइपलाइन के माध्यम से इसकी लागत घटकर 80-100 रुपये रह जाती है।

उन्होंने कहा कि एक बार जब उक्त परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी तो इससे परिवहन लागत और समय, दोनों में कमी आएगी।

फिक्की की इस्पात समिति के उपाध्यक्ष और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के प्रबंध निदेशक वी आर शर्मा ने उद्योग की लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने के लिए मंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध किया।

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