नयी दिल्ली, एक मई उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को गोवा सरकार को राज्य में बंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ के उन पूर्व कर्मचारियों के लिए जल्द से जल्द नियम बनाने का निर्देश दिया, जिन्हें सेवानिवृत्ति के तीन से सात साल बीत जाने के बाद भी उनकी पेंशन की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ को गोवा सरकार की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि ऐसे 21 कर्मचारियों में से 19 को अंतरिम पेंशन लाभ का भुगतान किया गया है।
दीवान ने कहा, “अंतिम समझौता करने के लिए हमें नियम बनाने होंगे, जिस पर किया जा रहा है और उन्हें जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा।”
बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के वकील ने कहा कि 28 अप्रैल को उच्च न्यायालय के महापंजीयक और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक में सब कुछ तय कर लिया गया था और नियमों को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेज दिया गया है।
पीठ ने कहा, “यह एक उच्च न्यायालय है और बंबई उच्च न्यायालय में समान कार्य करने वाले व्यक्तियों को पेंशन लाभ का भुगतान किया जाता है, लेकिन गोवा में ऐसा नहीं हो रहा है। समान कार्य करने वालों के लिए दो नियम नहीं हो सकते। एक व्यक्ति को आत्महत्या करनी पड़ी तब जाकर अधिकारी हरकत में आए। उसके कानूनी उत्तराधिकारियों का पता लगाएं और उन्हें भुगतान करें। नियमों बनाकर उन्हें जल्द से जल्द स्वीकृत किया जाना चाहिए।”
न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद रखी है।
शीर्ष अदालत ने 17 अप्रैल को उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के कुछ पूर्व कर्मचारियों द्वारा प्रधान न्यायाधीश को लिखे गए एक पत्र का संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि तीन से सात साल बीत जाने के बावजूद उनकी पेंशन बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
सर्वोच्च अदालत ने पत्र पर स्वत:संज्ञान लेते हुए इस याचिका में तब्दील कर दिया और महाराष्ट्र व गोवा सरकार के साथ बंबई उच्च न्यायालय के महापंजीयक को नोटिस जारी किया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY