चंडीगढ़, 28 सितंबर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि राज्य को 1961 से काफी पहले पुर्तगाली शासन से मुक्त किया जा सकता था, अगर तत्कालीन सरकार ने जनभावना पर ध्यान दिया होता।
सावंत ने करनैल सिंह बेनीपाल की पत्नी चरणजीत कौर (84) से मुलाकात के बाद, एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। करनैल सिंह बेनीपाल ने 1955 में राज्य के पुर्तगाली शासन से मुक्ति के लिए हुए संग्राम में अपने प्राणों की आहुति दी थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद प्रदेश को मुक्ति के लिए 14 साल और इंतजार नहीं करना पड़ता, अगर गोवा विमोचन सहायक समिति के बैनर तले इकट्ठा हुए ''सत्याग्रहियों'' को पुर्तगालियों के हाथों जान न गंवानी पड़ती।
कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ''अगर भारत जोड़ो आंदोलन तब शुरू किया गया होता, तो इतने लोगों को अपने जीवन का बलिदान नहीं देना पड़ता''।
गोवा के मुख्यमंत्री ने अंबाला के बरोला गांव में सिंह के परिवार से मुलाकात के बाद उन्हें 10 लाख रुपये का चेक सौंपा।
सावंत ने कहा, ''गोवा सत्याग्रहियों, स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों का ऋणी है, जिन्होंने इसकी मुक्ति के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।''
गोवा को 1987 में राज्य का दर्जा मिला था। गोवा, 19 दिसंबर, 1961 को पुर्तगाली शासन से मुक्त हुआ था।
गोवा की आजादी के लिए बेनीपाल ने 25 साल की उम्र में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्हें 15 अगस्त 1955 को तटीय राज्य के पत्रादेवी में सीने पर गोलियां लगी थीं।
सावंत ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के एक बड़े समूह ने 15 अगस्त, 1955 को पत्रादेवी सीमा से गोवा में प्रवेश करने की कोशिश की, ''लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया और सेनानी शहीद हो गए। अगर सरकार ने थोड़ा ध्यान दिया होता, तो गोवा को 15 अगस्त, 1955 को आजाद कराया जा सकता था''।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों की याद में पत्रादेवी में एक स्मारक का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेनीपाल के परिवार ने अनुरोध किया है कि पत्रादेवी से गोवा में नये अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे तक जाने वाली सड़क का नाम उनके नाम पर रखा जाना चाहिए और सरकार इसके लिए सहमत हो गई है।
इस साल की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि अगर जवाहरलाल नेहरू चाहते, तो गोवा को 1947 में ‘‘कुछ घंटों के भीतर’’ मुक्त कराया जा सकता था।
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