अहमदाबाद, चार अप्रैल गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (जीएनएलयू) ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय को सूचित किया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान संस्थान के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा समिति (एचएलआरसी) का गठन किया जाएगा।
यह आश्वासन विश्वविद्यालय में एक समलैंगिक छात्र के उत्पीड़न और एक छात्रा से बलात्कार के आरोपों के मद्देनजर आया है।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी मायी की खंडपीठ इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान जीएनएलयू की ओर से पेश महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने पीठ को सूचित किया कि विश्वविद्यालय की शासकीय परिषद ने 23 मार्च को बैठक की और एचएलआरसी के गठन का निर्णय लिया।
समिति में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के अलावा अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और राज्य वित्त विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एम.एम. श्रीवास्तव सदस्य होंगे।
इसके अलावा, त्रिवेदी ने कहा कि "एक पारदर्शी और सतर्क आंतरिक शिकायत समिति के पुनर्गठन के लिए" विश्वविद्यालय द्वारा एक उप-समिति भी नियुक्त की जाएगी। इसमें अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीषा लवकुमार शाह और वरिष्ठ अधिवक्ता असीम पांड्या शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जीएनएलयू के लिए तुरंत एक पूर्णकालिक रजिस्ट्रार नियुक्त करने का भी निर्देश दिया।
जीएनएलयू की दलीलों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल ने विश्वविद्यालय को 29 अप्रैल को सुनवाई की अगली तारीख से पहले एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
अदालत ने पिछले साल 22 सितंबर की एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी और कहा था, "यह रिपोर्ट वास्तव में भयावह है।"
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