नयी दिल्ली, 13 दिसंबर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने प्रतियोगी परीक्षाओं के तनाव के कारण छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों का बुधवार को संज्ञान लिया और उच्च सदन के सदस्यों को इस मुद्दे पर चर्चा का प्रस्ताव देने के लिए कहा।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों ने प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण छात्रों की आत्महत्या पर पांच पूरक प्रश्न पूछे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभी पूरक प्रश्नों के जवाब दिए, लेकिन सदस्यों ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करना जारी रखा।
इस मुद्दे की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए धनखड़ ने कहा, ‘‘मैं सदस्यों से अपील करता हूं कि यह एक ऐसा मुद्दा है (जिसमें) हमें खुद को शामिल करना चाहिए। हम बड़ा योगदान दे सकते हैं।’’
उन्होंने एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया जहां छात्रों की आत्महत्या को कम किया जा सके और इसे शून्य पर लाया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘हर किसी को योगदान देना होता है। मैं इस मुद्दे पर चर्चा कराने को तैयार हूं।’’
इससे पहले, तारांकित प्रश्नों का सदन में जवाब देते हुए प्रधान ने सदन को बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2022 में 1,70,924 (1.70 लाख) आत्महत्याएं हुईं और इनमें से 2,051 या 1.2 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा में फेल होने के कारण आत्महत्या की।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसकी (छात्रों की आत्महत्या) जिम्मेदारी लेता हूं। यह शून्य होना चाहिए।’’
शिवसेना सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने एक पूरक प्रश्न में पूछा कि यह देखते हुए कि पिछले एक दशक में आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, सरकार कोई ‘डेटा-बिल्डिंग सिस्टम’ तैयार करने की योजना बना रही है?
प्रधान ने 2022 के एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उनके सामने ऐसा कोई तथ्य नहीं है।
चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने ‘पूरी जिम्मेदारी’ के साथ सदन में डेटा रखा है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में जवाब दिया था कि 2018 से 2021 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों के कम से कम 15 छात्रों ने आत्महत्या की है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान एससी/एसटी/ओबीसी समुदायों के 13,000 से अधिक छात्रों ने आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों से पढ़ाई छोड़ दी है।
वेणुगोपाल ने कहा कि जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न या छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या सरकार इन चीजों पर गंभीर कार्रवाई करेगी?
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