नयी दिल्ली, 10 अप्रैल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि जेनरेटिव कृत्रिम मेधा (जेनरेटिव एआई) अपेक्षाकृत नई परिघटना है और सामाजिक संरचनाओं की सुरक्षा और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए नवाचार और विनियमन के बीच एक अच्छा संतुलन बनाया जाना चाहिए।
वैष्णव ने यहां ‘वूमन जर्नलिस्ट वेल्फेयर ट्रस्ट’ के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी और एआई जहां बदलावकारी ताकतों के साथ जिंदगी को आसान बना रहे हैं, वहीं सुरक्षा उपायों के बगैर ये सदियों पुरानी स्थापित संरचनाओं के लिए नकारात्मक जोखिम भी पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में नियमों एवं कानूनों के एक नए समूह की जरूरत है।
वैष्णव ने कहा, ‘‘एक बहुत ही जोखिम भरा पक्ष है जो हमारे समाज, लोकतंत्र और कई सामाजिक संरचनाओं को प्रभावित कर रहा है। इन्हें दशकों और सदियों के दौरान सावधानीपूर्वक बनाया गया था। कई संस्थाएं जो समाज की रक्षा करने और हमें सौहार्दपूर्ण तरीके से रहना सुनिश्चित करने के लिए थीं, उनपर हमला हो रहा है।”
मंत्री ने कहा कि एआई औद्योगिक जगत में तीन दशकों से मौजूद रही है लेकिन अब जेनरेटरेटिव एआई का इस्तेमाल एक सामान्य उपयोगकर्ता भी कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर मानवीय रचनात्मकता से जुड़ी हुई चीजों का एआई द्वारा बनाना एकदम नई परिघटना थी और इसने एक नई चुनौती पैदा कर दी।
वैष्णव ने कहा, ‘‘हमें उस रास्ते पर कुछ आम सहमति बनानी चाहिए जिसके द्वारा समाज आगे बढ़ सके। भारत में हम मानते हैं कि हमारे पास नवाचार और विनियमन का एक अच्छा संतुलन होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक हितधारक की आवाज सुनी जाए, समझी जाए और उसका उचित विश्लेषण किया जाए।’’
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