देश की खबरें | गहलोत ने ओपीएस पर आहलूवालिया के बयान को खारिज करते हुए कहा: मानवीय दृष्टिकोण से बहाल किया

जयपुर, सात जनवरी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाली को लेकर की गई टिप्पणी को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह तो अपने (वित्त) विभाग के वित्तीय प्रबंधन में विश्वास करते हैं।

आहलूवालिया द्वारा ओपीएस पर सवाल खड़े किए जाने व इससे आर्थिक आपातकाल आने की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने शनिवार को यहां संवाददाताओं से कहा, "हम तो ये मानते हैं कि हमारा मैनेजमेंट जो है... वित्तीय प्रबंधन हमारे विभाग ने किया है, हम लोगों ने बैठकर बातचीत की है, हमारा मानना है कि कोई काम ऐसा नहीं है जो कि हो नहीं सकता हो।"

उन्होंने कहा कि सारे अर्थशास्त्री अपनी बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनकी सरकार को अपने विभाग द्वारा किए गए वित्तीय प्रबंधन पर भरोसा है।

गहलोत ने कहा कि अगर ओपीएस लागू करने और कर्मचारियों को पेंशन देने के बाद देश 60 साल तक प्रगति कर सकता है तो वह इसे अब भी जारी रख सकता है और कहा कि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर 60 साल तक देश जो है ओपीएस को लागू करके और पेंशन देकर भी विकास कर सकता है, तो क्या एक इंसान को जो नौकरी कर रहा है कर्मचारी, क्या उसको जिंदगी में बुढ़ापे के अंदर सिक्योरिटी महसूस करने का अधिकार नहीं है क्या?’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने "मानवीय दृष्टिकोण' से ओपीएस को बहाल करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ‘‘और माननीय दृष्टिकोण भी है कि वो कर्मचारी तकलीफ पाएगा, टेंशन में काम करेगा, तो गुड गवर्नेंस में वो पूरी तरह भागीदारी नहीं निभा पाएगा।’’

उन्होंने केंद्र सरकार पर सेना को ओपीएस लाभ देकर व बीएसएफ तथा आईटीबीपी को न देकर "भेदभाव" करने का भी आरोप लगाया। गहलोत ने कहा, ‘‘इन्होंने केंद्र सरकार ने क्या भेदभाव किया? आर्मी को ओपीएस और बीएसएफ को ओपीएस नहीं, इंडो-तिब्बत पुलिस को ओपीएस नहीं, पैरा-मिलिट्री फोर्सेज को ओपीएस नहीं, एनपीएस.. आर्मी को ओपीएस, ये भेदभाव क्यों ? तो ये इसका जवाब दें इसका।’’

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