जयपुर/नयी दिल्ली, 20 जुलाई राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस के बागी नेता सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि जिस 'निकम्मे एवं नकारा' प्रदेशाध्यक्ष को इतना मान सम्मान दिया गया वही पार्टी की पीठ में छुरा भोंकने को तैयार हो गया।
वहीं, राजस्थान में जारी राजनीतिक रस्साकशी के बीच कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ने सोमवार को आरोप लगाया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने उनसे पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने के बारे में चर्चा की थी और इसके लिए धन की पेशकश भी की थी।
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हालांकि पायलट ने इस आरोप को 'आधारहीन व अफसोसजनक' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि विधायक से यह बयान दिलवाया गया है और वह उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की कि एसओजी की तरफ से भेजा गया नोटिस उन्हें शनिवार को मिला है, जिसमें ‘‘वॉइस सैंपलिंग’’ और ‘‘स्टेटमेंट रिकॉर्ड’’ करने का आग्रह किया गया है। साथ ही पूछताछ के लिए उनसे समय और तारीख बताने को भी कहा गया है।
उन्होंने कहा कि जिस ऑडियो क्लिप के आधार पर राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने विधायकों के कथित खरीद-फरोख्त मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, पहले उसकी सत्यता प्रमाणित करे।
इससे पहले भाजपा ने ''अवैध'' रूप से फोन-टैप किए जाने के मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।
इस बीच, राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सोमवार को कांग्रेस के बागी विधायक विश्वेन्द्र सिंह और भंवरलाल शर्मा को ब्यूरो के समक्ष पेश होने के लिये नोटिस जारी किये।
ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को नोटिस जारी कर उन्हें तीन दिन के भीतर ब्यूरो में पेश होने को कहा है।
ऑडियो क्लिप की बातचीत में सरकार को अस्थिर करने के कथित षड्यंत्र के मामले में ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज की थी।
उधर, राजनीतिक उठापटक के बीच सोमवार को अदालती लड़ाई भी जारी रही। राजस्थान उच्च न्यायालय सचिन पायलट और 18 अन्य असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों की याचिका पर मंगलवार को फिर सुनवाई करेगा। इन लोगों ने याचिका में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य करार दिए जाने के नोटिस को चुनौती दी है।
सोमवार को सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती ने कहा कि इसे मंगलवार को पूरा किया जाएगा। मंगलवार को फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है।
वहीं, कांग्रेस ने मंगलवार को विधायक दल की बैठक बुलाई है। लगभग एक सप्ताह में तीसरी बार बैठक बुलाई गई है।
इस बीच, गहलोत ने सचिन पायलट के खिलाफ बेहद तीखे शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने पायलट का नाम लिए बिना निशाना साधते हुए कहा कि जिस 'निकम्मे एवं नकारा' प्रदेशाध्यक्ष को इतना मान सम्मान दिया गया वही पार्टी की पीठ में छुरा भोंकने को तैयार हो गया।
गहलोत ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पायलट सात साल तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे लेकिन पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया।
गहलोत ने कहा, ‘‘हिंदुस्तान में राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सात साल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की कभी मांग नहीं हुई। हम जानते थे कि 'निक्कमा' है, 'नकारा' है, कुछ काम नहीं कर रहा है ... खाली लोगों को लड़वा रहा है।’’
उधर, प्रदेश के बाड़ी से विधायक मलिंगा ने मीडिया से कहा कि अपने कुछ काम के सिलसिले में वह दो बार तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पायलट से मिले।
मलिंगा के अनुसार इस दौरान पायलट ने उनसे कहा, 'भाजपा में चलना है .. पार्टी छोड़नी है।' मलिंगा के अनुसार इस दौरान पायलट ने पैसों की भी चर्चा की और कहा गया कि 'आप मुंह तो खोलो जितना चाहोगे पैसा मिलेगा।'
यह पूछे जाने पर कि इस बात का क्या सबूत हैं, इस पर मलिंगा ने कहा,' अगर मेरी बात झूठी है तो पायलट आकर कह दें कि मैं झूठ बोल रहा हूं ... बाकी मैं तो मंदिर में जाकर भी यह बात कह सकता हूं।'
मलिंगा के अनुसार उन्होंने पायलट से कहा कि उनकी आत्मा इस तरह के काम के लिए नहीं मान रही। विधायक ने कहा कि उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बताया था।
मलिंगा के अनुसार यह घटनाक्रम पंचायतों के परिसीमन के समय से पिछले छह सात महीने से चल रहा था।
पायलट ने इन आरोपों को 'आधारहीन व अफसोसजनक' बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी छवि को धूमिल करने के लिए उनके खिलाफ इस तरह के आरोप लगवाए जा रहे हैं।
पायलट के प्रवक्ता के व्हाट्सएप ग्रुप में एक बयान जारी किया गया। इसमें पायलट ने कहा, ‘‘मुझ पर इस तरह के आधारहीन आरोप लगाए जाने से मैं उदास हूं लेकिन हैरान नहीं हूं। इसका एकमात्र उद्देश्य मुझे बदनाम करना है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘उन विधायक के खिलाफ उचित एवं कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी जिनसे इस तरह के आरोप लगवाए गए हैं।’’
पायलट के समर्थक विधायक मुकेश भाकर ने सोमवार को कहा कि अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल नहीं होंगे और उनकी लड़ाई सिर्फ प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन कर पार्टी को बचाने की है।
नागौर जिले की लाडनूं विधानसभा क्षेत्र से विधायक भाकर ने कहा कि राज्य में कांग्रेस को बचाने के लिए आलाकमान को सरकार के नेतृत्व में बदलाव करना चाहिए।
दूसरी ओर, उच्च न्यायालय में विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि याचिका समय से पहले दायर की गई है क्योंकि सदन से विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने पर फैसला लिया जाना अभी बाकी है।
पार्टी व्हिप की अवज्ञा करने को लेकर विधायकों को राजस्थान विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के लिये पार्टी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत किये जाने के बाद यह नोटिस विधायकों को जारी किया गया था। पायलट खेमे की हालांकि दलील है कि पार्टी का व्हिप तभी लागू होता है जब विधानसभा का सत्र चल रहा हो।
कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को दी गई अपनी शिकायत में पायलट और अन्य असंतुष्ट विधायकों के खिलाफ संविधान की 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2(1)(ए) के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 107 विधायक हैं। इनमें पूर्व उप मुख्यमंत्री पायलट और उनके खेमे के 18 असंतुष्ट विधायक भी हैं।
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