देश की खबरें | गहलोत सरकार ने 31 जुलाई को विधानसभा सत्र बुलाने पर जोर दिया,एजेंडे में विश्वासमत का उल्लेख नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान सरकार ने विधानसभा का सत्र 31 जुलाई से बुलाने के लिए एक संशोधित प्रस्ताव मंगलवार को राज्यपाल कलराज मिश्र को भेजा। हालांकि, इसमें यह उल्लेख नहीं किया है कि वह विधानसभा सत्र में विश्वास मत हासिल करना चाहती है या नहीं। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

जयपुर/नयी दिल्ली, 28 जुलाई राजस्थान सरकार ने विधानसभा का सत्र 31 जुलाई से बुलाने के लिए एक संशोधित प्रस्ताव मंगलवार को राज्यपाल कलराज मिश्र को भेजा। हालांकि, इसमें यह उल्लेख नहीं किया है कि वह विधानसभा सत्र में विश्वास मत हासिल करना चाहती है या नहीं। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि विधानसभा का सत्र बुलाये जाने के लिये राज्य सरकार से प्राप्त एक प्रस्ताव मिश्र द्वारा लौटाए जाने के साथ दिये गये सुझावों पर चर्चा करने के बाद मंत्रिमंडल ने यह रुख अपनाया है।

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राजस्थान में सियासी संकट के बीच भाजपा विधायक मदन दिलावर ने मंगलवार को उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दायर की। इसमें उन्होंने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खेमों के बीच जारी रस्साकशी के बीच बसपा ने भी मामले में एक पक्ष बनने के अनुरोध को लेकर अदालत का रूख किया है।

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इसबीच, कांग्रेस के बागी विधायक भंवरलाल शर्मा ने मंगलवार को राजस्थान उच्च न्यायालय का रुख कर ऑडियो टेप प्रकरण में उनके खिलाफ एसओजी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया है।

कांग्रेस के विधायक विधानसभा सत्र बुलाये जाने की मांग को लेकर पिछले सप्ताह राजभवन में धरने पर बैठ गये थे, जिसके बाद से गहलोत सरकार और राज्यपाल के बीच गतिरोध चल रहा है।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया था। राज्यपाल मिश्र ने सोमवार को कहा था कि विधानसभा का सत्र नहीं बुलाने की उनकी कोई मंशा नहीं है।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य सरकार से कहा था कि विधानसभा सत्र बुलाने के अपने प्रस्ताव को फिर से उनके पास भेजे। राज्यपाल ने सरकार के संशोधित प्रस्ताव को सरकार को तीन बिंदुओं के साथ लौटा दिया है।

इसके साथ ही इसमें राजभवन की ओर से कहा गया कि यदि राज्य सरकार विश्वास मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्पावधि में सत्र बुलाए जाने का युक्तिसंगत आधार बन सकता है। राज्यपाल ने रेखांकित किया था कि इसके लिए 21 दिन का स्पष्ट नोटिस देना होगा।

राजस्थान कैबिनेट की बैठक मंगलवार को यहां हुई जिसमें विधानसभा सत्र बुलाने के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा की गयी। बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सरकार 31 जुलाई से सत्र चाहती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''हम 31 जुलाई से सत्र चाहते हैं। जो पहले प्रस्ताव था वह हमारा अधिकार है, कानूनी अधिकार है। उसी को हम वापस भेज रहे हैं।'

खाचरियावास ने कहा,'‘ ... हमें पूरी उम्मीद है कि राज्यपाल महोदय देश के संविधान का सम्मान करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव को मंजूर करेंगे।'

मंत्री ने कहा, ‘‘हम लोग राज्यपाल से टकराव नहीं चाहते। हमारी राज्यपाल से कोई नाराजगी नहीं है। न ही हम दोनों में कोई प्रतिस्पर्धा है। राज्यपाल महोदय हमारे परिवार के मुखिया हैं।’’

यह तीसरी बार है, जब गहलोत सरकार ने विधानसभा सत्र बुलाये जाने के लिए राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा राजस्थान में उसकी सरकार को गिराने की ‘‘साजिश’’ रच रही है और राज्यपाल ‘‘दबाव’’ में काम रहे हैं।

इस बीच, भाजपा विधायक मदन दिलावर ने मंगलवार को राजस्थान उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दायर की। इसमें उन्होंने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी है।

बसपा ने मामले में उसे शामिल करने की अपील की है। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि पार्टी ने ‘‘असंवैधानिक’’ विलय को लेकर कांग्रेस को ‘‘सबक सिखाने’’ का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो बसपा इस मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय जायेगी।

कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडे ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, ‘‘...राजस्थान में उत्पन्न हुए संकट के सन्दर्भ में देखने में आ रहा है कि राजस्थान के महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र जी एक पार्टी विशेष के हितों की पूर्ति हेतु पक्षपात पूर्ण रवैया अपना रहे हैं, जो कि हमारे संविधान में उल्लेखित नियमों का सरेआम उल्लंघन है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी अपील है कि राज्यपाल महोदय एकपक्षीय सोच के संक्रमण से जल्द स्वस्थ होने की कामना की जाए, ताकि वे निष्पक्षता से संविधान और प्रजातंत्र की रक्षा हेतु तत्काल विधानसभा सत्र बुलाने पर अपनी सहमति प्रदान करें, जिससे संविधान में निहित प्रावधानों की रक्षा हो।’’

राज्य की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 107 विधायक हैं। लेकिन 19 विधायकों के बगावत कर जाने के बाद यह निर्दलीय विधायकों एवं सहयोगी दलों के सहयोग के बावजूद संकट की स्थिति का सामना कर रही है। भाजपा के 72 विधायक हैं।

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