देश की खबरें | 'वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर अर्दली के तौर पर कार्यरत पुलिसकर्मियों को मुक्त करें'

चेन्नई, 21 जून मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर घरेलू कार्यों के लिए तैनात निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को मुक्त किया जाए। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मियों को इस तरह के कार्यों में लगाना गैर कानूनी है।

अदालत ने कहा कि अधिकारियों के घरेलू कार्यों के लिए वर्दीधारी बल के व्यक्ति का उपयोग करना अवैध है और ऐसे अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाने चाहिए।

न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि 45,000 रुपया वेतन पाने वाले प्रशिक्षित पुलिसकर्मी को वरिष्ठ अधिकारियों के घरों पर अर्दली के तौर पर नहीं लगाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के आवासों पर अर्दली के तौर पर नियुक्त पुलिसकर्मियों को तत्काल हटाना सुनिश्चित करना चाहिए।

अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब यू मानिकवेल की एक रिट याचिका में उन्हें पुलिस क्वार्टर से बेदखल करने के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिस पर आज आगे की सुनवाई हुई।

पुलिस उच्चाधिकारियों और राजनेताओं के बीच गठजोड़ के दोष बयां हुए न्यायाधीश ने कहा कि इससे आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। साथ ही यह भी कहा कि पुलिस अधिकारी नेताओं से गुलदस्ता लेकर नहीं मिले, यह भी एक कदाचार है। ऐसे अ€धिकारी बिना भय या पक्षपात के कार्रवाई करने में समर्थ नहीं होंगे।

अतिरिक्त महाधिवक्ता पी कुमारसन ने न्यायाधीश को सूचित किया कि पिछले सप्ताह दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई उनकी टिप्पणी को मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के समक्ष उठाया गया था, जिन्होंने उचित कदम उठाए हैं। इस पर न्यायाधीश ने कार्रवाई शुरू करने के लिए सरकार की सराहना की।

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