तिरूवनंतपुरम, एक जून बलात्कार के आरोपों के बाद, 2018 में पोप फ्रांसिस द्वारा अस्थायी रूप से कार्यमुक्त कर दिये गये बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने जालंधर बिशप के पद से इस्तीफा दे दिया है। भारत में वेटिकन के एक प्रतिनिधि ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मुलक्कल पर एक नन ने बलात्कार का आरोप लगाया था।
गिरजाघर के एक अधिकारी ने बताया कि बलात्कार के मामले में केरल की एक अदालत द्वारा बरी किये जाने के डेढ़ साल बाद मुलक्कल ने इस्तीफा दिया है। उनका यह कदम डिकोसे (बिशप के क्षेत्र) में एक नये बिशप की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उल्लेखनीय है कि एक वीडियो में, बिशप ने यह पुष्टि की है कि वेटिकन ने आज उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
भारत में वेटिकन के शीर्ष स्तरीय राजनयिक मिशन ने एक बयान में कहा, ‘‘फादर पोप फ्रांसिस ने फ्रैंको मुलक्कल द्वारा जालंधर के बिशप के तौर पर सौंपा गया इस्तीफा आज, एक जून 2023 को स्वीकार कर लिया।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘इस सिलसिले में मिशन यह उल्लेख करना चाहता है कि वेटिकन अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत, कोट्टायम के फैसले का सम्मान करता है, जिसमें बिशप मुलक्कल को उन पर लगाये गये आरोपों से बरी कर दिया गया था। साथ ही, उन्हें बरी किये जाने के फैसले के खिलाफ की गई उस अपील का भी वह सम्मान करता है, जिसे केरल उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।’’
मुलक्कल अभी जालंधर के बिशप एमेरिटस हैं। वीडियो में उन्होंने उनके मुश्किल समय में उनका समर्थन करने वाले लोगों का शुक्रिया अदा किया।
गिरजाघर के एक सूत्र ने बताया कि वेटिकन ने बिशप को सूचित किया है कि उनके इस्तीफे को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाएगा। उन्होंने बताया कि बिशप को आधिकारिक विदाई देने की भी अनुमति दी जाएगी।
सूत्र ने बताया कि जालंधर बिशप एमेरिटस होने के बावजूद मुलक्कल डिकोसे में नहीं रहेंगे। इसके बजाय वह कोट्टायम में एक आश्रय केंद्र में तब तक रहेंगे, जब तक कि उच्च न्यायालय बलात्कार के मामले में नन की अपील पर अपना फैसला नहीं सुना देता है।
मुलक्कल ने इस साल आठ फरवरी को पोप से मुलाकात की थी और बलात्कार के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत-1, कोट्टायम द्वारा बरी किये जाने के बाद फ्रांसिस से उनकी यह पहली मुलाकात थी।
बलात्कार के आरोपों को लेकर केरल पुलिस द्वारा पूछताछ किये जाने के बाद सितंबर 2018 में बिशप को पोप फ्रांसिस ने डिकोसे को उनकी जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से मुक्त कर दिया था।
हालांकि, बलात्कार के मामले में बरी कर दिये जाने के बावजूद मुलक्कल को गिरजाघर में नयी जिम्मेदारियां नहीं दी गई।
नन ने मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था। नन ने आरोप लगाया था कि 2014 से 2016 के बीच केरल के कोट्टायम स्थित एक कंवेंट की यात्रा के दौरान बिशप ने उसके साथ कई बार बलात्कार किया था।
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