जांजगीर (छत्तीसगढ़), 20 अप्रैल छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की एक विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में जिला सहकारी बैंक के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और पूर्व अधिकारी पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
जिले के विशेष लोक अभियोजक एमएल श्रीकांत ने बुधवार को बताया कि विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) सुरेश जून की अदालत ने श्रवण सिंह को भ्रष्टाचार का दोषी पाया है तथा उसे पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई है और पांच लाख रुपए जुर्माना लगाया है।
श्रीकांत ने बताया कि राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के दल ने 16 फरवरी, 2017 को सिंह के परिसरों पर छापा मारा था। इस दौरान सिंह सहकारी बैंक जांजगीर-चांपा में नोडल अधिकारी के रूप में पदस्थ थे। श्रीकांत ने बताया कि छापेमारी के दौरान सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के नाम से 2.02 करोड़ रुपए चल-अचल संपत्ति होने की जानकारी मिली थी।
उन्होंने बताया कि ईओडब्ल्यू ने सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, तथा मामले को विशेष अदालत में पेश किया गया था। इधर सिंह बाद में अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए।
श्रीकांत ने बताया कि मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सिंह को भ्रष्टाचार का दोषी पाया है। अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि मामले के तथ्यों, आरोपी की उम्र, अपराध की प्रकृति, आय से 40.11 प्रतिशत अधिक राशि, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 23 के प्रावधानों और मामले की अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिंह को पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई जाती है और सिंह को पांच लाख रुपए जुर्माना भी भरना होगा।
उन्होंने बताया कि जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। श्रीकांत ने बताया कि अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि 45.21 लाख रुपए की संपत्ति आरोपी की आय के ज्ञात स्रोत से अधिक पाई गई है। यह उसकी आय के ज्ञात स्रोत से 40.11 प्रतिशत अधिक है। इसलिए अदालत का मत है कि उक्त राशि की सीमा तक की संपत्ति को जब्त कर लिया जाए।
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