जयपुर, 11 अगस्त राजस्थान में एक व्यक्ति की शिकायत पर कांग्रेस विधायक गोपाल मीणा और पांच पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। अनुसूचित जाति समुदाय के पीड़ित ने आरोप लगाया कि विधायक ने उससे अपना जूता चटवाया जबकि एक पुलिस अधिकारी ने उस पर पेशाब किया। पुलिस अधिकारियों पर परिवादी की पिटाई करने का भी आरोप लगा है।
पुलिस ने कहा है कि शुरुआती जांच में यह मामला झूठा पाया गया है। पुलिस के अनुसार यह मामला सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी नवदीप सिंह की शह पर दर्ज करवाया गया है। नवदीप सिंह का स्थानीय आदिवासी एवं दलित समुदाय के लोगों से जमीन को लेकर विवाद है।
विधायक मीणा ने भी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि संपत्ति संबंधी विवाद के कारण उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं।
नवदीप सिंह 2018 में महानिदेशक (होमगार्ड) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने के पीछे उनका हाथ नहीं है।
पुलिस ने कहा कि अदालत के निर्देश पर 27 जुलाई को भादंसं की धारा 363, 448, 323, 341 और 342 और अजा जजा(अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई थी। जमवारामगढ़ थाना प्रभारी सीताराम सैनी ने बताया कि मामला 27 जुलाई को अदालती इस्तगासे के माध्यम से दर्ज किया गया था और इसे जांच के लिए अपराध अन्वेषण शाखा (सीआईडी-सीबी) को भेजा गया है।
थानाधिकारी ने बताया कि प्राथमिकी में वृत्ताधिकारी शिवकुमार भारद्वाज के साथ साथ जमवारामगढ़ थाना सहित चार पुलिस थानों के थाना अधिकारियों के भी नाम है।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि घटना 30 जून की है जब वह खेत में काम कर रहा था। तभी पुलिस उसे उठा कर एक जगह ले गई जहां जमवारामगढ़ के विधायक गोपाल मीणा ने उसे जूता चाटने के लिए मजबूर किया। उसने पुलिस वृत्ताधिकारी शिवकुमार भारद्वाज पर उस पर पेशाब करने का भी आरोप लगाया है।
संपर्क करने पर विधायक ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि संपत्ति संबंधी विवाद के चलते उन पर फर्जी आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा,‘‘यह दबाव बनाने की चाल है। कुछ लोग चाहते हैं कि मैं अवैध भूमि अतिक्रमण में उनकी मदद करूं।’’ उन्होंने कहा कि वह मामला दर्ज कराने वाले आदमी को नहीं जानते।
वहीं राजस्थान पुलिस की ओर से जारी बयान के अनुसार अपहरण कर पीटने, पेशाब करने व जूते चटवाने जैसे आरोपों के साथ इस्तगासा की जरिये दर्ज करवाये गये मामले की अब तक की तफ्तीश में अपहरण कर मारपीट करने, पेशाब करने व जूते चटवाने जैसी घटना पूर्णतः मिथ्या व निराधार पाई गई है।
इसमें कहा गया है, 'प्रारंभिक जांच के अनुसार यह मामला सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी नवदीप सिंह की शह पर दर्ज करवाया गया है। नवदीप सिंह का कई वर्षों से जमवारामगढ़ इलाके के गांव टोडालडी आंधी में इस जमीन पर निवास कर रहे स्थानीय कब्जाधारी आदिवासी व दलित समुदाय के लोगों से विवाद चल रहा है।
नवदीप सिंह ने इन कब्जों का हटाने के लिए अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए दूसरे हलके के पटवारी को बुलाकर पत्थरगढ़ी करवानी चाही। इन्होंने पुलिस अधिकारियों पर भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन संभावित अवैधानिकता व कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पुलिस इनके नाजायज दबाव में नहीं आई।'
इसके अनुसार जमीन पर अधिकारी द्वारा द्वारा किये गये कृत्यों के संबंध में स्थानीय निवासियों द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाया। इस मामले का अनुसंधान पुलिस उप अधीक्षक शिव कुमार भारद्वाज द्वारा किया जा रहा था।
नवदीप सिंह ने इस मामले में शीघ्र अंतिम रिपोर्ट (एफआर) देकर मामले को तत्काल बंद करने के लिए अनुचित दबाव डालना प्रारम्भ कर दिया और सोची समझी साजिश के तहत अपने व्यक्ति से 156/3 में इस्तगासा करके यह मुकदमा दर्ज करवाया।
इसके अनुसार, 'करीब एक महीने के अन्तराल के बाद मीडिया का ध्यान आकर्षित करने एवं पुलिस पर दबाव बनाने के साथ ही विवादास्पद भूमि पर पुनः कब्जा करने के लिए यह षडयंत्र रचा गया। गैर हलके में जाकर गैर कानून तरीके से पत्थरगढ़ी करने के मामले जिला कलेक्टर द्वारा संबंधित पटवारी को निलम्बित किया जा चुका है।'
बयान में कहा गया है, 'नवदीप सिंह को पहले भी उनके द्वारा विधिविरुद्ध कार्य करने पर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।'
संपर्क करने पर पूर्व आईपीएस अधिकारी नवदीप सिंह ने कहा कि जमीन उनकी पत्नी की कंपनी के नाम पर खरीदी गई थी लेकिन स्थानीय अधिकारी जमीन के सीमांकन में बाधा पैदा कर रहे थे, जो पटवारी द्वारा किया जाना था।
उन्होंने कहा, 'स्थानीय अधिकारी विधायक के प्रभाव में हैं। सीमांकन 30 जून को निर्धारित था लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि अधिकारी विधायक से निर्देश चाहते थे।'
सिंह ने कहा कि प्राथमिकी का शिकायतकर्ता एक स्थानीय व्यक्ति है और केवल वही उसमें लगाए गए आरोपों के बारे में बता सकते है। उन्होंने कहा, 'प्राथमिकी मेरी शह पर दर्ज नहीं करवाई गई और यह तो शिकायतकर्ता ही बताएगा कि उसने क्या आरोप लगाए हैं।'
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यहां शुक्रवार को पार्टी की विधानसभा चुनाव संबंधी तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद संवाददाताओं द्वारा इस इस संबंध में सवाल किए जाने पर कहा कि उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट मंगवाई है।
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