नयी दिल्ली, एक अप्रैल वित्त मंत्रालय ने अन्य मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि अपनी ओर से परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये नियुक्त इकाइयों को आश्वासन पत्र जारी न करें। राजकोषीय प्रबंधन में सुधार के प्रयासों के तहत यह कदम उठाया गया है।
आश्वासन पत्र (लेटर ऑफ कम्फर्ट) में कुछ बाध्यताओं को लेकर प्रतिबद्धता जतायी जाती है। मंत्रालयों या विभागों से संबंधित इकाइयों या ठेकेदारों को यह पत्र मिलने से उन्हें परियोजना के लिये तेजी से वित्त जुटाने में मदद मिलती है।
वित्त मंत्रालय के 31 मार्च को जारी एक कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार के किसी भी मंत्रालयों या विभाग या इकाई को आश्वासन पत्र जारी करने के अधिकार को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जा रहा है।
इसके अनुसार, ‘‘अत: सरकार की कोई भी इकाई आश्वासन पत्र जारी नहीं करेगी।’’
रेलवे जैसे बुनियादी ढांचा से संबंधित मंत्रालयों को परियोजनाओं के विकास से जुड़े ठेकेदारों को आश्वासन पत्र जारी करने का अधिकार था।
ऐसी आशंका थी कि आश्वासन पत्रों का दुरूपयोग हो सकता है।
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