नयी दिल्ली, 28 जनवरी उद्योग मंडल फिक्की के सदस्यों ने बजट से पहले मांग बढ़ाने और वृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्यक्ष कर ढांचे की समीक्षा का समर्थन किया है।
फिक्की ने अपने सदस्यों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, कर स्लैब और कर दरों पर फिर से विचार करना जरूरी है क्योंकि इससे लोगों के हाथों में अधिक पैसा आ सकता है और अर्थव्यवस्था में खपत की मांग बढ़ सकती है।
फिक्की ने यह बजट-पूर्व सर्वेक्षण दिसंबर, 2024 के अंत और जनवरी, 2025 के मध्य के बीच किया था। सर्वेक्षण में विभिन्न क्षेत्रों की 150 से अधिक कंपनियों से प्रतिक्रियाएं मिलीं।
सर्वेक्षण में शामिल सदस्यों को उम्मीद है कि नए वित्त वर्ष 2025-26 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.5-6.9 प्रतिशत होगी।
उत्तरदाताओं ने कर व्यवस्था को सरल बनाने, हरित प्रौद्योगिकियों/ नवीकरणीय और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के विकास को प्रोत्साहित करने और डिजिटलीकरण के जरिये अनुपालन आसान बनाने के लिए एक मजबूत नीतिगत कदम उठाने का भी आह्वान किया।
फिक्की सर्वेक्षण में कर निश्चितता प्रदान करने, सीमा शुल्क में उतार-चढ़ाव को हल करने और टीडीएस प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाने पर भी जोर दिया गया है।
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