चंडीगढ़, पांच जून पंजाब में किसान प्रवासी मजदूरों को अग्रिम भुगतान, अधिक मजदूरी और उनकी वापसी के लिए कन्फर्म ट्रेन टिकट की पेशकश करके वापस बुलाने का प्रयास कर रहे हैं।
इसी तरह से लॉकडाउन में छूट के बाद उत्पादन क्षमता बढ़ाने का इच्छुक औद्योगिक क्षेत्र प्रवासी मजदूरों की वापसी का खर्च वहन करने पर विचार कर रहा है।
कृषि और उद्योग, दोनों ही क्षेत्र को श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कई प्रवासी मजदूर कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश और बिहार स्थित अपने मूल स्थान लौट गए हैं।
एक ओर धान की रोपाई की मजदूरी लगभग दोगुनी होकर एक एकड़ के लिए छह हजार से सात हजार रुपये हो गई है। वहीं उद्योग मजदूरों की कमी, कच्चे माल के उपलब्ध नहीं होने आदि कारणों से अपनी पूर्ण क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।
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किसानों ने कहा कि उन्हें ऐसे समय श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है जब उन्हें धान की रोपाई के लिए कार्यबल की जरूरत है जो राज्य में 10 जून से शुरू होनी है।
किसान सरबजीत सिंह लैडी ने कहा, ‘‘वर्तमान समय में सीमांत जिले अमृतसर में मजदूरों की काफी कमी है।’’
उन्होंने कहा कि उनकी योजना श्रमिकों को वापस लाने के लिए बसें उत्तर प्रदेश और बिहार भेजने की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि ऐसे में जब ट्रेन सेवाएं बहाल हो गई हैं हमने अपनी योजना बदल दी। अब हम अपने श्रमिकों के लिए ट्रेन की शयनयान श्रेणी की टिकट बुक करा रहे हैं। वे 14 जून से वापस आने लगेंगे।’’
बरनाला जिले के चिन्नीवाल गांव के किसान जगसीर सिंह ने कहा कि उन्होंने और अन्य किसानों ने श्रमिकों को वापस लाने के लिए तीन बसें उत्तर प्रदेश और बिहार भेजी हैं।
उन्होंने कहा कि श्रमिक यहां आने पर कोरोना वायरस के मद्देनजर खेतों में रहेंगे।
किसानों ने कहा कि वे श्रमिकों को अधिक मजदूरी की भी पेशकश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ किसान श्रमिकों के बैंक खातों में पांच हजार से 10 हजार रुपये का अग्रिम भुगतान भी जमा करा रहे हैं।
हालांकि प्रवासी श्रमिक अपने नियोक्ताओं से रोपाई मौसम के बाद सुरक्षित वापसी का भरोसा देने के लिए कह रहे हैं।
यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डी एस चावला ने शुक्रवार को कहा कि कई उद्योगपतियों ने अपने श्रमिकों से सम्पर्क किया है और उनकी वापसी का खर्च वहन करने की पेशकश की है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने श्रमिकों को वापस आने को कह रहे हैं और उनकी वापसी का खर्च वहन करने की बात कर रहे हैं।’’
चावला ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार से भी प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल स्थानों से उसी तरह से वापस लाने का आग्रह किया है जिस तरह से उन्हें पंजाब से भेजा गया था।
उन्होंने साथ ही कहा कि भविष्य में मजदूरों की कमी की किसी भी स्थिति से बचने के लिए स्थानीय युवाओं एवं महिलाओं को कारखानों में काम करने के लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
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