किसानों के साथ ग्रामीण, शहरों से आए पर्यटक तथा हिमालयी राष्ट्र का दौरा करने वाले लोग भी इस उत्सव में शामिल हुए।
चावल लाखों नेपालियों का मुख्य आहार माना जाता है। इसकी फसल आम तौर पर साल में एक बार जुलाई में बोई जाती है और लगभग चार महीने बाद काटी जाती है।
किसानों और उनके परिवारों ने चावल उगाने के लिए जरूरी वर्षा का स्वागत करने के लिए पारंपरिक गीत गाए और समय पर वर्षा करने के लिए देवताओं को धन्यवाद दिया।
किसानों ने चावल को कतारों में रोपने के बाद, कीचड़ भरे खेतों में छींटे मारे, एक-दूसरे पर मिट्टी तथा रेत लगाई, नृत्य किया और दावत के साथ उत्सव का समापन किया।
इस दिन को ‘‘दही चिवड़ा’’ (दही और पीटा चावल) भी कहा जाता है, जो दावत के दौरान खाए जाने वाले मुख्य व्यंजनों में से एक है।
देश में अन्य स्थानों पर अक्सर लोग इस दिन घर में आम और केले के साथ दही तथा चिवड़ा खाते हैं।
सरकार ने इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहने की घोषणा कर रखी है, ताकि लोगों को चावल की खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके क्योंकि लोग तेजी से अन्य पेशों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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