देश की खबरें | आबकारी नीति:अदालत ने धन शोधन मामले में विजय नायर, अन्य को जमानत देने से किया इनकार

नयी दिल्ली, तीन जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने आबकारी नीति में कथित घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के संचार प्रभारी विजय नायर को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से पता चलता है कि संभावित लाभार्थियों द्वारा दी गई रिश्वत की राशि का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया था।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने अलग-अलग आदेशों में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली और शराब कंपनी पेरनोड रिकॉर्ड के अधिकारी बिनॉय बाबू की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी।

अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक ‘‘पवित्र अधिकार है और सुनवाई से पहले हिरासत को दंडात्मक उपाय के रूप में नहीं लिया जा सकता’’, ऐसे अधिकार को बड़े पैमाने पर समाज के अधिकार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति ने नायर की जमानत याचिका पर पारित अपने 45 पन्नों के आदेश में कहा कि आरोप ‘‘बेहद गंभीर प्रकृति के’’ हैं और वर्तमान मामले में कथित साजिश ‘‘विशिष्ट प्रकृति है, जहां आबकारी नीति कथित तौर पर गलत मंशा से तैयार की गई थी।’’

अदालत ने कहा, ‘‘वर्तमान मामले में आरोपी व्यक्ति (नायर) ने साजिश को आगे बढ़ाते हुए नीति को दरकिनार कर दिया और इसे इस तरह से तैयार किया कि अवैध धन लगातार प्राप्त होता रहे।’’

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘दिनेश अरोड़ा (सरकारी गवाह)...ने विशेष रूप से कहा कि याचिकाकर्ता विजय नायर ने अरुण पिल्लई, अभिषेक बोइनपल्ली और बुची बाबू (जो साउथ ग्रुप के प्रतिनिधि थे) के साथ एक समझौता किया। साउथ ग्रुप ने विजय नायर को अग्रिम रकम के रूप में (लगभग) 100 करोड़ रुपये दिए और उन्हें यह राशि तीन प्रमुख थोक विक्रेताओं से वसूल करनी थी। रिकॉर्ड में यह भी बयान है कि रिश्वत की इस राशि का इस्तेमाल गोवा चुनावों में कैसे किया गया था।’’

दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को आबकारी नीति लागू की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया था।

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