देश की खबरें | पुलिस द्वारा अत्यधिक बलप्रयोग को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, 13 मार्च संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ दिसंबर 2019 में हुए प्रदर्शनों के बाद यहां जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई कथित ज्यादतियों संबंधी याचिकाओं की सुनवाई कर रहे दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अत्यधिक बल प्रयोग को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता और संबंधित प्राधिकारी अपने आचरण के लिए जवाबदेह हैं।

इस मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहीं इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि मौजूदा मामले में पुलिस द्वारा किया गया बल प्रयोग पूरी तरह से अनुचित था और उन्होंने अदालत से पूर्व न्यायाधीशों की सदस्यता वाली एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन करने की अपील की, ताकि और राहत देने के लिए ‘‘प्रामाणिक’’ घटनाक्रम का पता लगाया जा सके।

बहरहाल, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यामूर्ति तलवंत सिंह की पीठ को दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पहले ही इस पहलू पर एक रिपोर्ट तैयार कर ली है।

पीठ ने निर्देश दिया कि एनएचआरसी की रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को दी जाए।

अदालत ने कहा, ‘‘बल के अत्यधिक उपयोग को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता। वे (पुलिस अधिकारी) जवाबदेह हैं। ये अधिकारी बल के अत्यधिक इस्तेमाल के लिए जवाबदेह हैं, इसलिए आप (याचिकाकर्ता) यहां हैं।’’

एक अन्य मामले में, अदालत ने विश्वविद्यालयों में बल प्रयोग और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों संबंधी दिशा-निर्देश दिए जाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं के संबंध में याचिकाकर्ता को लिखित अभिवेदन दाखिल करने को कहा। इस मामले में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने किया।

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