नयी दिल्ली, 25 सितंबर भारत और यूरोपीय संघ हरित परियोजनाओं के क्षेत्र में शोध और नवप्रवर्तन सहयोग बढ़ाएंगे।
यूरोपीय संघ ने एक बयान में कहा कि वह जैवप्रौद्योगिक विभाग के साथ विभिन्न इकाइयों के साथ जुड़कर पांच क्षेत्रों... स्वच्छ, सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा, स्वच्छ और संसाधनों के अधिकतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था के लिये उद्योग, खेतों से उपभोग रणनीति के तहत परीक्षण और नवप्रवर्तन, जैवविविधता और पारिस्थितिकी सेवाएं एवं शून्य प्रदूषण तथा विषैले गैस मुक्त पर्यावरण... में सहयोग को लेकर काम करेगा।
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यह सहयोग ‘होराइजन 2020 ग्रीन डील वर्क प्रोग्राम’ के तहत किया जाएगा।
इस साल 15 जुलाई को यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को चिन्हित किये जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
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बयान के अनुसार, ‘‘भारत और यूरोप के बीच शोध और नवप्रर्तन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के मकसद से जैव प्रौद्योगिकी विभाग सफल भारतीय प्रतिभागियों को पांच क्षेत्रों में यूरोपीय इकाइयों के साथ मिलकर परियोजनाओं पर काम करने को लेकर वित्त पोषण करेगा। इस सहयोग से भारत की अनुसंधान क्षमता मजबूत होगी और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत हरित भारत, सतत कृषि और जलवायु परिर्वतन तथा ऊर्जा पर ईयू-भारत भागीदारी में योगदान देगा।’’
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