ताजा खबरें | अगले पांच साल में वाहनों से संबंधित पूरा परिदृश्य बदल जाएगा : गडकरी

नयी दिल्ली, 16 मार्च केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में उम्मीद जतायी कि डीजल व पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की संख्या में अगले दो-तीन साल में खासी कमी आएगी और इलेक्ट्रिक सहित विभिन्न वैकल्पिक ईंधनों से चलने वाले वाहनों की संख्या बढ़ेगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में वाहनों से संबंधित पूरा परिदृश्य बदल जाएगा। गडकरी ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की।

डीजल व पेट्रोल से चलने वाले वाहनों पर अधिक खर्च आने का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि आने वाले समय में वाहनों से जुड़ा परिदृश्य बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन साल में डीजल व पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की संख्या में खासी कमी आएगी और इलेक्ट्रिक सहित विभिन्न वैकल्पिक ईंधनों से चलने वाले वाहनों की संख्या बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों पर आने वाले खर्च को देखते हुए लोग स्वाभाविक रूप से ऐसे वाहनों को पसंद करेंगे। उन्होंने वैकल्पिक ईंधनों से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के विभिन्न कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि अगले पांच साल में पूरा परिदृश्य बदल जाएगा।

गडकरी ने कहा कि इससे एक ओर लोगों को ईंधन पर होने वाले भारी खर्च से राहत मिलेगी वहीं कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी। यूरोप व अन्य देशों में गैर-पारंपरिक ईंधनों से चलने वाले वाहनों पर जोर दिए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसका पर्यावरण पर भी अच्छा असर होगा और विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से भी निजात मिल सकेगी।

उन्होंने भारतीय इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि वे काफी प्रतिभाशाली हैं और उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों व इससे संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है।

गडगरी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग से जुड़े बुनियादी ढांचे की कमी के मुद्दे को खारिज करते हुए कहा कि आने वाले समय में वह दिन आएगा जब चार्जिंग व्यवस्था सभी कार्यालयों सहित हर जगह होगी। उन्होंने कहा कि स्कूटर और कार निर्माता छोटे चार्जर मुहैया करा रहे हैं और पूरे दिन कार का उपयोग करने के बाद रात में चार्ज किया जा सकता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि बैटरी की लागत एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, "लिथियम आयन एक बड़ी चुनौती है। हमारे पास लिथियम आयन नहीं है। लगभग 81 प्रतिशत बैटरी हम यहां भारत में बनाते हैं। अब लिथियम आयन दुनिया में उपलब्ध है। सरकार कुछ खानों का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में है।"

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत 8 लाख करोड़ रुपये मूल्य के कच्चे तेल का आयात करता है जिसके अगले पांच साल में बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यह समय अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और पर्यावरण के हित में वैकल्पिक ईंधन, बिजली, इथेनॉल, हरित हाइड्रोजन आदि को अपनाने का है और देश उस रास्ते पर बढ़ रहा है।

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