बेंगलुरु, पांच फरवरी केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह ने रविवार को कहा कि ऊर्जा रूपांतरण पर बातचीत का दायरा बढ़ाये जाने की जरूरत है और उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और उस तक पहुंच जैसी चुनौतियों के संबंध में विचार-विमर्श पर जोर दिया।
उन्होंने यहां भारत की अध्यक्षता में जी-20 देशों के ऊर्जा अंतरण कार्यसमूह (ईटीडब्ल्यूजी-1) की पहली बैठक के इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘यह आज सबसे महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि आप ऊर्जा के बिना विकास नहीं कर सकते। विकास का मतलब ऊर्जा है।’’
उन्होंने कहा कि जलवायु संकट है और दुनिया को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेंटीग्रेड से कम करने के लिए उत्सर्जन को कम किया जाए और इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि प्रौद्योगिकी, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला जैसी ऊर्जा रूपांतरण के लिए विभिन्न चुनौतियों पर ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि ये महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा रूपांतरण पर बातचीत का दायरा बढ़ाये जाने की जरूरत है और उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा तथा उस तक पहुंच जैसी चुनौतियों के संबंध में विचार-विमर्श पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में लगभग 60-80 करोड़ लोग हैं जिनकी ऊर्जा तक पहुंच नहीं है, और आप उनके पास जाकर ऊर्जा रूपांतरण के बारे में बात नहीं कर सकते, आप उनसे यह नहीं कह सकते कि वे अपना चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी ना काटें, आप उनसे वनों की कटाई और अन्य चीजों के बारे में बात नहीं कर सकते।’’
सिंह ने कहा, ‘‘जब ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे का सामना करना पड़ता है, तो उस देश के लिए ऊर्जा रूपांतरण का मुद्दा पीछे चला जाता है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा पहले आती है।’’
उन्होंने कहा कि ऊर्जा भंडारण आवश्यक है क्योंकि दुनिया अक्षय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इसे व्यवहार्य बनाने और क्षेत्र में निवेश की आवश्यकता पर बल दिया।
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