नयी दिल्ली, पांच जून कोविड-19 के लिए देश में विकसित एलिजा किट को मानवीय सीरम के नमूनों में कोरोना वायरस एंटीबॉडी का पता लगाने में संवेदनशील एवं निश्चित पाया गया है और इसका इस्तेमाल आम लोगों के बीच संक्रमण के जोखिम को निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसंधानकर्ताओं एवं अन्य द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि किट का प्रयोग प्रतिरक्षित (एक्सपोज्ड इम्यून प्रोटेक्टेड) व्यक्तियों में जोखिम का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
अध्ययन में कहा गया कि एलिजा जांच किट 92.37 प्रतिशत अनुक्रियाशील, 97.9 प्रतिशत निश्चित, मजबूत एवं प्रतिलिपि प्रस्तुत करने योग्य पाई गई है।
सकारात्मक एवं नकारात्मक पूर्वानुमानसूचक मूल्य क्रमश: 94.44 और 98.14 प्रतिशत है यानि जांच में पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति में संक्रमण होने की संभावना 94.44 प्रतिशत है और जांच में नेगेटिव पाए गए व्यक्ति में संक्रमण न होने की संभावना 98.14 प्रतिशत है।
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स्वास्थ्य अनुसंधान का शीर्ष निकाय, आईसीएमआर कोरोना वायरस के संपर्क में आई आबादी का अनुमान लगाने के लिए एक सर्वेक्षण कर रहा है जिसमें एलिजा आधारित एंटीबॉडी जांच को डेटा संग्रहण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
अनुसंधानकर्ताओं ने इस बात का विशेष तौर पर उल्लेख किया है कि उभरते और फिर से उभरते विषाणुओं की निगरानी के लिए सीरम (प्रोटीन से भरा द्रव) परीक्षण की विस्तृत अनुशंसा की जाती है। कोविड-19 के लिए कई एलिजा (एंजाइम लिंक्ड इ्म्युनोसोर्बेंट एसे) किट विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
मामलों का पता लगाने के लिए प्रमाणित एवं स्वीकृत सार्स-सीओवी-2 सीरमीय परीक्षण की कमी है और उन्हें कोविड-19 के लिए प्रयोगशाला परीक्षण संबंधी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों में शामिल नहीं किया गया है।
इस अध्ययन के परिणाम ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (आईजेएमआर) में प्रकाशित किए गए हैं।
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