नयी दिल्ली, 15 मई राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी गौतम नवलखा की उस अर्जी का सोमवार को विरोध किया जिसमें उन्होंने खुद को महाराष्ट्र के रायगढ़ में अलीबाग क्षेत्र स्थित एक घर में नजरबंद रखने का अनुरोध किया है। नवलखा फिलहाल मुंबई के एक सार्वजनिक पुस्तकालय में नजरबंद हैं।
एनआईए और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ को बताया कि नवलखा को उनके अनुरोध पर अलीबाग के घर में रखना संभव नहीं होगा, क्योंकि यह निचली अदालत से 110 किलोमीटर दूर है तथा इस दूरी को तय करने में कम से कम साढ़े तीन घंटे लगते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी समस्या यह है कि अलीबाग का यह घर रिहायशी इलाके में स्थित है जहां घेरा डालना बहुत ही कठिन है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से भी यह संभव नहीं है।’’
राजू ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता ने इससे पहले चिकित्सा के आधार पर जेल की जगह नजरबंद रखने का अनुरोध किया था और उस वक्त कहा था कि उन्हें अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, लेकिन अब वह जिस इलाके में नजरबंद रखने का अनुरोध कर रहे हैं वहां कोई भी सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार नजरबंदी के लिए दिया गया उनका आधार नाटक था।’’
नवलखा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नित्य रामकृष्णन ने एनआईए की दलील का विरोध किया और कहा कि वह नजरबंदी के स्थान के निर्धारण का मामला बातचीत से सुलझाने को तैयार हैं।
पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू से कहा कि वह अपनी आपत्तियां लिखित में दें और मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी।
शीर्ष अदालत ने नवलखा की नजरबंदी की अवधि कई बार बढ़ाई है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY