स्विट्जरलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शांति शिखर सम्मेलन में हालांकि कुछ प्रमुख विकासशील देश शामिल नहीं हुए।
सम्मेलन का आयोजन स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में किया गया था। रूस को सम्मेलन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था।
सम्मेलन में मौजूद कई लोगों ने उम्मीद जताई कि रूस शांति की रूपरेखा पर चर्चा में शामिल हो सकता है।
सम्मेलन में लगभग 100 प्रतिनिधिमंडल आए थे, जिनमें से ज्यादातर पश्चिमी देश थे। सम्मेलन में कुछ प्रमुख विकासशील देश भी शामिल हुए थे।
भारत, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात उन देशों में शामिल थे, जिनका प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रियों या दूतों ने किया था तथा इन्होंने अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किये। दस्तावेज में परमाणु सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और कैदियों के आदान-प्रदान के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
ब्राजील एक ‘‘पर्यवेक्षक’’ देश है और इसने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे तुर्किये ने हस्ताक्षर किए।
अंतिम दस्तावेज में कहा गया है कि यूक्रेन में न्यायसंगत और स्थायी शांति का माहौल बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और “क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के प्रति सम्मान …आवश्यक है।
कार्यक्रम की मेजबानी करने वाले स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति वियोला एमहर्ड ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ज्यादातर प्रतिभागियों ने अंतिम दस्तावेज को लेकर सहमति व्यक्त की है जिससे ‘‘पता चलता है कि कूटनीति के जरिये क्या हासिल किया जा सकता है’’।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने “शांति की दिशा में पहला कदम उठाये जाने” की बैठक में सराहना की।
बैठक में ऐसे समय में युद्ध की ओर पुनः ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया, जब गाजा में संघर्ष, राष्ट्रीय चुनाव और अन्य चिंताओं ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है।
अंतिम वक्तव्य में परमाणु सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और कैदियों के आदान-प्रदान के तीन विषयों पर चर्चा की गई।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि ये रूस के साथ वार्ता के लिए ‘‘न्यूनतम शर्तें’’ हैं।
व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने शनिवार को रिसॉर्ट में पत्रकारों से कहा कि इसके लिए “काम करना होगा” और कतर जैसे देशों के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य देशों को आगे आना होगा।
इन देशों ने इस संबंध में भी बात की कि किस तरह से परमाणु सुरक्षा, कैदियों की अदला-बदली और यूक्रेन से खाद्यान्न निर्यात के मुद्दों को सुलझाया जाए।
एपी
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