देश की खबरें | परब एवं अन्य से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत कई स्थानों पर ईडी का छापा

नयी दिल्ली/मुंबई, 26 मई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रत्नागिरि जिले के तटीय दापोली इलाके में भूमि सौदे में कथित अनियमितताओं और अन्य आरोपों को लेकर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री अनिल परब एवं अन्य के खिलाफ धनशोधन मामले की जांच के तहत राज्य में बृहस्पतिवार को कई स्थानों पर छापे मारे।

संघीय एजेंसी ने धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत एक ताजा मामला दर्ज किया है। मुंबई में परब के आधिकारिक आवास, दापोली और पुणे में संबंधित परिसरों समेत कम से कम सात परिसरों पर एजेंसी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा मुहैया कराई गई सुरक्षा के साथ छापे मार रही है।

ऐसा समझा जाता है कि छापेमारी के दौरान मंत्री अपने आवास पर मौजूद थे।

तीन बार महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित परब (57) राज्य के परिवहन मंत्री हैं। उनके खिलाफ अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए गए हैं और ऐसा समझा जाता है कि निदेशालय का ताजा मामला इन्हीं आरोपों पर आधारित है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई दापोली में 2017 में परब द्वारा एक करोड़ रुपए के प्रतिफल मूल्य पर एक भूखंड की खरीद संबंधी आरोपों से जुड़ी है। इस भूखंड को 2019 में पंजीकृत किया गया था। एजेंसी कुछ अन्य आरोपों की भी जांच कर रही है।

आरोप है कि इस भूखंड को बाद में मुंबई के केबल ऑपरेटर सदानंद कदम को 2020 में 1.10 करोड़ रुपए के प्रतिफल मूल्य पर बेच दिया गया था। इस बीच, इसी जमीन पर 2017 से 2020 तक एक रिजॉर्ट बनाया गया।

आयकर विभाग ने कदम और उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) बजरंग खरमाटे जैसे, परब के कुछ करीबी लोगों के खिलाफ मार्च में छापे मारे थे, जिसके बाद उसने मंत्री पर ये आरोप लगाए थे।

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मार्च में जारी एक बयान में कहा था कि रिजॉर्ट का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था और इसके निर्माण में छह करोड़ रुपए नकद खर्च किए गए थे।

इससे पहले, निदेशालय ने पूर्व मंत्री अनिल देशमुख से जुड़े धनशोधन के एक अन्य मामले में परब से पूछताछ की थी।

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास के निकट एक एसयूवी में विस्फोटक पदार्थ मिलने संबंधी मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा गिरफ्तार किए गए पूर्व पुलिस अधिकारी सचिज वाजे ने भी परब पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए थे।

महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के गठबंधन वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसियां केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के कहने पर उनके दलों के नेताओं और परिवारों को निशाना बना रही हैं।

भाजपा के नेताओं का कहना है कि एजेंसियां अपना काम स्वतंत्र रूप से और सबूतों के आधार पर कर रही हैं।

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