नयी दिल्ली, एक अगस्त तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनकी पत्नी मेगला ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास किसी आरोपी से हिरासत में पूछताछ करने का कोई निहित अधिकार नहीं है।
इस साल 14 जून को गिरफ्तारी के बावजूद तमिलनाडु सरकार में बिना विभाग के मंत्री बालाजी और उनकी पत्नी ने राज्य के परिवहन विभाग में कथित नौकरी के बदले नकदी घोटाले से संबंधित धनशोधन मामले में अपनी गिरफ्तारी को बरकरार रखने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश की आलोचना की।
बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने कहा कि गिरफ्तारी की तारीख से 15 दिन की अवधि समाप्त हो जाने के बाद, जांच एजेंसी हिरासत में पूछताछ की मांग नहीं कर सकती क्योंकि कानून के तहत इसकी अनुमति नहीं है।
न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश की खंडपीठ ने मामले को दो अगस्त को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। दो अगस्त को सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ईडी की ओर से अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं।
मेहता ने कहा कि मामले के तथ्यों से पता चलता है कि कैसे “सिस्टम की अनदेखी की गई।”
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें बुधवार को विस्तृत दलीलें पेश करने की अनुमति दी जाए।
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