राजनीति में वंशवाद ‘सबसे घातक’, कुछ दलों का ‘इकोसिस्टम’ असल मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगा: प्रधानमंत्री मोदी

जयपुर, 20 मई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने विकासवाद की राजनीति पर बल देते हुए शुक्रवार को आरोप लगाया कि कुछ पार्टियों का ‘‘इकोसिस्टम’’ पूरी शक्ति से देश के विकास से जुड़े मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगा हुआ है, लिहाजा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं व कार्यकर्ताओं को ऐसी पार्टियों के जाल में ना फंसते हुए विकास और राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्होंने वंशवाद और परिवारवाद के मुद्दे पर भी कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों पर करारा हमला किया और इस ‘‘परंपरा’’ को लोकतंत्र के लिए ‘‘सबसे घातक’’ करार देते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से इसके खिलाफ ‘‘अनवरत संघर्ष’’ करने का आह्वान किया. भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक के उद्घाटन सत्र को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर यह आरोप भी लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए वह तनाव की छोटी-मोटी घटनाओं को ढूंढ-ढूंढकर समाज में जहर बो रहे हैं और कभी जाति तो कभी क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को भड़का रहे हैं.

मोदी ने कहा कि आजादी के बाद से ही वंशवाद और परिवारवाद ने देश का भीषण नुकसान किया है और परिवारवादी पार्टियों ने भ्रष्टाचार, धांधली और भाई-भतीजावाद को आधार बनाकर देश का बहुत मूल्यवान समय बर्बाद किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी ये परिवारवादी पार्टियां देश को पीछे ले जाने पर तुली हुई हैं. मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री ने वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर लगातार निशाना साधा है. भाजपा के स्थापना दिवस पर भी वह परिवारवादी पार्टियों पर जमकर बरसे थे. उन्होंने कहा कि इनका, ‘‘सार्वजनिक जीवन परिवार से शुरू होता है, परिवार के लिए चलता है, परिवार की खातिर ही आगे बढ़ता है.’’ मोदी ने परिवारवाद को ‘‘लोकतंत्र के लिए सबसे घातक परंपरा’’ करार देते हुए कहा कि अगर लोकतंत्र को बचाना है और उसे सामर्थ्यवान व मूल्यनिष्ठ बनाना है तो भाजपा को वंशवाद व परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ अनवरत संघर्ष करना ही है.

उन्होंने कहा, ‘‘इस अमृत काल में हमारा यह भी संकल्प होना चाहिए कि देश को लोकतांत्रिक मूल्यों से जरा भी कटने नहीं देंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और हम देश की जनता का विश्वास जीतेंगे ताकि वंशवादी व परिवारवादी शक्तियों को देश की जनता निकाल दे.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा में लोकतांत्रिक मूल्यों की एक मजबूत परंपरा रही है और उसे निरंतर मजबूत करते रहना है. उन्होंने कहा, ‘‘यह भाजपा है, ठहरा हुआ पानी नहीं है. भाजपा निरंतर प्रवाहमान है. हमने दल के रूप में खुद को लगातार विकसित किया है. वंशवाद और परिवारवाद के कीचड़ में भी हमने कमल को खिलाया है, जो लोकतंत्र की मूलभूत पंखुड़ियों को प्रदर्शित करता है. परिवारवाद की राजनीति से विश्वासघात पाने वाले देश के युवाओं का विश्वास सिर्फ भाजपा ही लौटा सकती है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा ने विकासवाद की राजनीति को देश की राजनीति की मुख्यधारा बना दिया है और यही वजह है कि चुनावों में विरोधी दल भी इस विषय पर बात करने को मजबूर हो जाते है. यह भी पढ़ें : राज ठाकरे का अयोध्या दौरा स्थगित करने पर BJP सांसद बृजभूषण सिंह ने कहा- माफी नहीं मांग कर पुराने जख्म को ताजा किया

उन्होंने कहा, ‘‘समाज को तोड़ने वाली राजनीति करने वाले हों या शॉर्टकट नुस्खे अपनाकर सत्ता पाने की चाह रखने वाले हों, ना चाहते हुए भी चुनाव में हर किसी को विकास पर बात करनी ही पड़ती है.’’ मोदी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने राजनीति में विकासवाद को भी विकृति की दिशा में धकेल दिया है और तात्कालिक लाभ के लिए वह देश के उज्जवल भविष्य के साथ और देश की युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, उसे खोखला करने का भी काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए समाज में जो छोटे-मोटे तनाव होते हैं... कुछ कमजोरियां होती हैं... उसे ढूंढ-ढूंढकर... उसमें जहर डालने का काम करते रहते हैं. उन कमजोरियों पर ही खेलते रहते हैं. वे कभी जाति के नाम पर, कभी क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को भड़का रहे हैं.’’ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से इन सबसे सावधान व सचेत रहने को कहा.

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि आजकल कुछ पार्टियों का इकोसिस्टम पूरी शक्ति से देश को मुख्य मुद्दों से भटकाने में लगा हुआ है. उन्होंने कहा, ‘‘यह इकोसिस्टम विकास के मुद्दों पर आगे नहीं बढ़ने देगा... लेकिन इन सबके बावजूद हमें कभी ऐसी पार्टियों के जाल में नहीं फंसना है. हमें अपने मार्ग पर डटे रहना है. विकास के मुद्दों पर टिके रहना है. देश हित के मुद्दों पर टिके रहना है.’’ इससे पहले, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कहा कि केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के आठ वर्ष देश के संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और सुरक्षा को समर्पित रहे हैं और इस दौरान किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिशें हुईं. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया में भारत के प्रति ‘‘एक विशेष भावना’’ जागृत हुई है और वह देश की ओर बहुत उम्मीदों से देख रही है, ठीक इसी प्रकार देश की जनता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति ‘‘एक विशेष स्नेह’’ रखती है और उसकी ओर बहुत उम्मीदों से देख रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा भले ही अभी तक की अपनी राजनीतिक यात्रा के शिखर पर हो लेकिन उसका मूल लक्ष्य भारत को उस ऊंचाई पर पहुंचाना है, जिसका सपना देश की आजादी के लिए मर मिटने वालों ने देखा था.

मालूम हो कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भाजपा-नीत केंद्र सरकार आगामी 30 मई को केंद्र की सत्ता में आठ साल पूरे कर रही है. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वह देश भर में अभियान चलाएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से कोई भी पात्र लाभार्थी वंचित ना रह जाए. मोदी ने कहा, ‘‘दुनिया में भारत के प्रति किस तरह की विशेष भावना जागृत हुई है, यह हम सब देख रहे हैं. दुनिया आज भारत को बहुत उम्मीदों से देख रही है. ठीक वैसे ही भारत में भाजपा के प्रति जनता का एक विशेष स्नेह अनुभव हो रहा है. देश की जनता को भाजपा पर बहुत विश्वास है. वह बहुत उम्मीद से भाजपा की ओर देख रही है.’’ आजादी की 100वीं वर्षगांठ के लिए बचे 25 सालों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इस ‘‘अमृत काल’’ में देश ने अपने लिए लक्ष्य तय किए हैं और भाजपा के लिए यह समय इन लक्ष्यों के लिए निरंतर काम करने का है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश के लोगों में निराशा का माहौल था और सरकारों से उनकी उम्मीदें समाप्त हो गई थीं लेकिन 2014 में हुए आम चुनाव में देश की जनता ने एक नया इतिहास लिखने का फैसला किया. उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक नफा नुकसान से अलग, मैं इसे जनमानस में आया बहुत बड़ा सकारात्मक परिवर्तन मानता हूं.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 18 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, 1300 से ज्यादा विधायक, 400 से अधिक उसके सांसद हैं और राज्यसभा में भी वर्षों के बाद वह 100 के आंकड़े को छूने जा रही है ‘‘लेकिन इसके बावजूद चैन से बैठने का हमारा कोई हक नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें सत्ता भोग ही करना होता तो भारत जैसे विशाल देश में कोई भी सोच सकता है, अरे इतना सारा मिल गया... अब तो बैठो... आराम करो ...जी नहीं, यह रास्ता हमारे लिए नहीं है. यह रास्ता हमें मंजूर ही नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इतनी अच्छी विजय पताका फहर रही है लेकिन आज भी, हम अधीर और बेचैन हैं, क्योंकि हमारा मूल लक्ष्य भारत को उस ऊंचाई पर पहुंचाना है, जिसका सपना देश की आजादी के लिए मर मिटने वालों ने देखा था.’’