नयी दिल्ली, छह मई एक नये शोध में अध्ययन किया गया कि वैश्विक महासागरीय पारिस्थितिकी तंत्रों का पोषण करने और वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को विनियमित करने में धूल का किस सीमा तक और कितना योगदान है।
धूल से आशय हवा द्वारा उड़ाए गए मिट्टी के कणों से है जो पृथ्वी की जलवायु पर असर डालते हैं।
यह शोध ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के एक वैज्ञानिक के नेतृत्व में किया गया। यह शोध जर्नल ‘साइंस’ में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ता लंबे समय से जानते हैं कि समुद्र में पाए जाने वाले फाइटोप्लांकटन प्रमुख पोषक तत्वों के लिए भूमि आधारित स्रोतों से उड़ी धूल पर निर्भर करता है।
कार्बन चक्र में महासागर अपने मार्ग (जैविक पंप) के जरिये अहम भूमिका निभाते हैं।
वायुमंडल का कार्बन डाइऑक्साइड महासागर की सतह पर मौजूद जल में घुल जाता है, लेकिन इस कार्बन को प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से फाइटोप्लांकटन कार्बनिक पदार्थ में बदल देते हैं।
इस कार्बनिक पदार्थ का कुछ हिस्सा सतह से महासागर की गहराई में पहुंच जाता है।
ओरेगन राज्य के एक समुद्र विज्ञानी और अध्ययन के प्रमुख लेखक टोबी वेस्टबेरी ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कार्बन को वायुमंडल से बाहर निकालने और गहरे समुद्र में नीचे जाने का एक मार्ग है।’’
मिश्रण या ‘अपस्वेलिंग’ के रूप में जानी जाने वाली एक प्रक्रिया के मुताबिक गहरे पानी से सतह तक पोषक तत्व पहुंचते हैं जो फाइटोप्लांकटन विकास के लिए अहम हैं। लेकिन कुछ पोषक तत्व वायुमंडलीय धूल से भी मिलते हैं।
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