नयी दिल्ली, सात अगस्त भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि मानसिक रूप से बीमार बेघर लोगों की कोरोना वायरस जांच के लिए संबंधित लैब या अस्पताल के पते के साथ डमी फोन नंबर का उपयोग किया जा सकता है।
इससे पहले आईसीएमआर द्वारा जारी परीक्षण दिशानिर्देश के तहत, कोविड-19 जांच के लिए सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र, वैध मोबाइल फोन नंबर या आवासीय प्रमाण जरूरी है।
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लेकिन इसके अभाव के कारण मानसिक रूप से बीमार बेघर लोगों की जांच नहीं हो पाने पर देश के शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान निकाय आईसीएमआर ने यह समाधान पेश किया है।
निकाय के प्रस्तावित समाधान पर गौर करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। याचिका में अनुरोध किया गया था कि दिल्ली में मानसिक रूप से बीमार बेघर व्यक्तियों के कोविड-19 परीक्षण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
पीठ ने कहा, "ऐसा लगता है कि अधिकारियों द्वारा पर्याप्त ध्यान दिया गया है।’’
पीठ ने अधिकारियों से बंसल के सुझाव पर भी विचार करने को कहा जिसमें मानसिक रूप से बेघर व्यक्तियों के लिए उस क्षेत्र में पुलिस अधिकारी के पहचान दस्तावेजों का उपयोग करने की बात की गयी है।
अदालत ने 24 जुलाई को आईसीएमआर को एक स्पष्टीकरण जारी करने को कहा था कि मानसिक रूप से बीमार बेघर व्यक्तियों की कोविड-19 जांच के लिए मोबाइल नंबर, सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र, फोटो या यहां तक कि आवासीय प्रमाण पर नहीं जोर दिया जाना चाहिए।
निकाय ने अपने हलफनामे में कहा है कि राज्य ऐसे लोगों की जांच के लिए शिविर लगाने की खातिर अपने दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं।
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