लखनऊ, नयी दिल्ली, 11 जुलाई कानपुर के नजदीक कुख्यात अपराधी विकास दुबे के एक कथित मुठभेड़ में मारे जाने के एक दिन बाद उसके चार सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया। उसके दो सहयोगियों को महाराष्ट्र और दो को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया गया। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उसकी संपत्तियों और लेन-देन के ब्यौरे की जांच करेगा।
विकास की अपराध फाइल को अधिकारियों को खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस ने उसकी पत्नी और बेटे को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था जो उसके अंतिम संस्कार के बाद लखनऊ स्थित अपने घर लौट आए हैं।
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उधर, कानपुर के बिकरू गांव में त्वरित प्रतिक्रिया बल को तैनात कर दिया गया है और पुलिस के वाहनों ने इलाके को घेर रखा है। इलाके में पुलिस लोगों से आगे आकर उसके बारे में सूचना देने की लगातार घोषणा कर रही है।
उत्तरप्रदेश सरकार ने कानपुर नगर में हुई घटना की जांच जांच विशेष जांच दल से कराने का निर्णय किया है।
अपर मुख्य सचिव (गृह एवं सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि इस सम्बन्ध में अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
अवस्थी ने बताया कि अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा तथा पुलिस उपमहानिरीक्षक जे रवीन्द्र गौड़ को एसआईटी का सदस्य नामित किया गया है।
उन्होंने बताया कि विशेष अनुसंधान दल प्रकरण से जुड़े विभिन्न बिन्दुओं और प्रकरण की गहन जांच सुनिश्चित करते हुए 31 जुलाई, 2020 तक जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगा।
महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने ठाणे से शनिवार को दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
ठाणे से गिरफ्तार दुबे का सहयोगी अरविंद उर्फ गुड्डन रामविलास त्रिवेदी (46) कानपुर जिले में कुख्यात अपराधी के घर छापेमारी के दौरान आठ पुलिसकर्मियों की हत्या में कथित तौर पर संलिप्त था। वह 2001 में उत्तर प्रदेश के नेता संतोष मिश्रा की हत्या में भी कथित तौर पर शामिल था।
एटीएस के पुलिस अधीक्षक विक्रम देशमाने ने कहा कि त्रिवेदी और उसके चालक सुशील उर्फ सोनू तिवारी (30) को ठाणे शहर के कोलशेट इलाके से गिरफ्तार किया गया।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से विकास दुबे गिरोह के दो सदस्यों शशिकांत पांडे और शिवम दुबे को ग्वालियर में शरण देने के मामले में ओमप्रकाश पांडे और अनिल पांडे को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया।
तीन जुलाई को पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से विकास दुबे फरार चल रहा था और उसे मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर से नौ जुलाई को गिरफ्तार किया गया। उसे महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया और अगले दिन कानपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में वह मारा गया।
विशेष कार्य बल की तरफ से जारी बयान के मुताबिक चालक ने सड़क पर पशुओं को बचाने का प्रयास किया जिसके बाद वाहन पलट गया। पुलिस ने दावा किया कि इसके बाद दुबे ने भागने का प्रयास किया और उसे मार गिराया गया।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी धनशोधन का एक मामला दर्ज करने वाला है। वह विकास दुबे, उसके परिवार के सदस्यों तथा उसके साथियों द्वारा अवैध वित्तीय लेन-देन तथा काली कमाई से अर्जित की गई संपत्ति की जांच करेगा।
निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ स्थित जांच एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय ने छह जुलाई को इस संबंध में कानपुर पुलिस को पत्र लिख कर दुबे (47) और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियां एवं अदालत में दायर किये गये आरोपपत्र तथा इन सभी मामलों की ताजा जानकारी मांगी है।
कानुपर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि कानपुर क्षेत्र के महानिरीक्षक (आईजी) मोहित अग्रवाल को ईडी का पत्र मिला है।
अधिकारियों ने कहा कि ईडी जल्द ही धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक शिकायत दर्ज कर यह जांच करेगा कि क्या दुबे, उसके परिवार के सदस्यों और उसके साथियों ने आपराधिक गतिविधियों से अर्जित किये गये धन का इस्तेमाल अवैध चल-अचल संपत्ति बनाने में किया था।
आरोप है कि दुबे ने अपनी आपराधिक गतिविधियों से अपने और अपने परिवार के नाम पर काफी संपत्ति बनाई।
उत्तरप्रदेश पुलिस जांच करेगी कि वह कैसे 30 वर्षों तक पुलिस जांच से बचा रहा और कई लोगों का मानना है कि पूरे प्रकरण में नेता-पुलिस-अपराधी मिलीभगत रही। लेकिन इन सब के बीच उसके गांव बिकरू में शांति है
गांव के अधिकतर लोग घरों में कैद हैं और दुबे के घर के बाहर करीब 60 पुलिसकर्मी निगरानी रख रहे हैं। पुलिसकर्मियों पर हमले के अगले दिन उसके घर को ढहा दिया गया था।
पुलिसकर्मी घोषणाएं कर लोगों से कह रहे हैं कि 24 घंटे के अंदर बाहर आकर उन लोगों के बारे में सूचनाएं दें जिन्होंने पुलिस के हथियार छीने थे। अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी।
कानुपर में दुबे का अंतिम संस्कार होने के बाद उसकी पत्नी रिचा, उसका बेटा और नौकरानी लखनऊ आ गये हैं।
पुलिस विभाग के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि ''कानपुर में शुक्रवार को दुबे के अंतिम संस्कार के बाद उसकी पत्नी,बेटा और नौकरानी लखनऊ आ गये है।''
कानपुर जेल के अधीक्षक आर के जायसवाल ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि कोरोना वायरस संकट के कारण रिचा दुबे और उसकी नौकरानी को कानपुर की जिला जेल या चौबेपुर में बनी अस्थायी जेल में नहीं ले जाया गया था।
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