देश की खबरें | दिव्यांगजनों को सहानुभूति का पात्र नहीं समझें, उनके ज्ञान, क्षमताओं से उनका मूल्यांकन करें: उपराष्ट्रपति

गुरुग्राम, नौ दिसंबर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लोगों से अपील की कि वे दिव्यांगजनों को सहानुभूति का पात्र भर नहीं समझें, बल्कि उनके ज्ञान,क्षमताओं और विशेषज्ञताओं के आधार पर उनका मूल्यांकन करें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस प्रकार का पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की आवश्यता है, जिसमें प्रतिभासंपन्न दिव्यांगजन फल-फूल सकें।

धनखड़ ने दिव्यांगता पर 10वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन अपने संबोधन में यह बात कही। इससे पहले, उन्होंने यहां सेक्टर 45 में सार्थक फाउंडेशन के ‘ग्लोबल रिसोर्स सेंटर’ का उद्घाटन किया।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अल्बर्ट आइंस्टीन का जिक्र किया, जिन्हें डिस्लेक्सिया था, लेकिन उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण खोज की और कई अहम सिद्धांतों का प्रतिपादन किया।

उन्होंने कहा,‘‘ मुझे महसूस हो रहा है कि आज मैं सही स्थान पर हूं। डॉ. जितेंद्र अग्रवाल, उनकी ऊर्जा और दृष्टि ने मुझे प्रेरित किया है। हरियाणा सरकार और केंद्र को उनकी पहल को लागू करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा,‘‘भारत 2030 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है और इस बदलाव का असर आम आदमी और उसके विकास पर भी पड़ेगा। साथ ही यह देश में दिव्यांगजन के सशक्तीकरण की दिशा में क्रांति का वाहक बनेगा।’’

उन्होंने ‘सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट’ को उसकी 15 साल की यात्रा के लिए बधाई दी। इस ट्रस्ट का दावा है कि उसने इस अवधि में देश भर में 70,000 से अधिक दिव्यांगजनों की मदद की।

‘सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट’ के संस्थापक डॉ जितेंद्र अग्रवाल ने एक बयान में कहा, ‘‘आज हम सभी के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि हम दिव्यांगजनों के लिए सार्थक ग्लोबल रिसोर्स सेंटर की शुरुआत कर रहे हैं। शिक्षा और कौशल के इस मंदिर से सभी को लाभ होगा और यह देश के सुदूर ग्रामीण स्थानों तक पहुंचेगा।’’

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