कोलकाता, 29 जुलाई कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने शनिवार को कहा कि शहर का निकाय अवैध निर्माण के सख्त खिलाफ है, लेकिन लोगों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल करने में विश्वास नहीं रखता।
हकीम कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की उस टिप्पणी का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि कोलकाता नगर निगम (केएमसी) अगर शहर में किसी अनधिकृत इमारत को ध्वस्त नहीं कर सकता तो वह उत्तर प्रदेश से एक बुलडोजर ले सकता है।
मेयर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम अवैध निर्माण नहीं होने देते, लेकिन इन स्थितियों से निपटने के लिए हम उचित प्रक्रिया का पालन करते हैं, जबरदस्ती नहीं करते।"
न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने यह बयान एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि केएमसी ने अदालत के पूर्व के आदेश के बावजूद एक अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया।
मामला उत्तरी कोलकाता के मानिकतला मेन रोड पर अनधिकृत निर्माण की शिकायत से संबंधित है, जिसे 2018 में उच्च न्यायालय ने ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।
बाद में उच्च न्यायालय के समक्ष यह आरोप लगाया गया कि केएमसी द्वारा ध्वस्त किये जाने बाद, उसी स्थान पर अवैध निर्माण फिर से हो गया है। 2021 में अदालत ने दोबारा निर्माण तोड़ने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय के समक्ष एक अवमानना याचिका दायर की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश के बावजूद इसका अनुपालन नहीं किया गया। केएमसी के वकील आलोक घोष ने कहा कि मामला अगले सप्ताह फिर से सुनवाई के लिए आएगा।
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