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विदेश की खबरें | क्या प्लास्टिक ऑटिज्म का कारण बनता है? नवीनतम अध्ययन में वास्तव में क्या कहा गया है?

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विदेश की खबरें | क्या प्लास्टिक ऑटिज्म का कारण बनता है? नवीनतम अध्ययन में वास्तव में क्या कहा गया है?
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मेलबर्न, 10 अगस्त (द कन्वरसेशन) हाल में प्रकाशित एक अध्ययन ने ऑटिज्म के विकास में प्लास्टिक की भूमिका के बारे में मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है।

विशेष रूप से, अध्ययन में ठोस प्लास्टिक के एक घटक - बिस्फेनॉल ए, या बीपीए - के गर्भ में शिशु के संपर्क में आने और लड़कों में तंत्रिका विकास से जुड़े इस विकार के विकसित होने के जोखिम पर ध्यान केंद्रित किया गया।

महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन से यह पता नहीं चलता कि बीपीए युक्त प्लास्टिक ऑटिज्म का कारण बनता है। लेकिन, इससे यह पता चलता है कि बीपीए शिशुओं और छोटे लड़कों में एस्ट्रोजन के स्तर में भूमिका निभा सकता है, जो उनके ऑटिज्म से पीड़ित होने की संभावना को प्रभावित कर सकता है। आइए विस्तार से जानें।

बीपीए क्या है?

बीपीए ठोस प्लास्टिक का एक घटक है जिसका उपयोग कुछ दशकों से किया जा रहा है। चूंकि, बीपीए भोजन और कुछ पेय पदार्थों के कंटेनर में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक में पाया जाता है, इसलिए कई लोग हर दिन मामूली रूप से बीपीए के संपर्क में आते हैं।

बीपीए हमारे स्वास्थ्य पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, इस बारे में चिंताएं काफी समय से बनी हुई हैं क्योंकि यह हमारे शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के प्रभावों को भी कमतर कर सकता है। हालांकि, यह क्रिया कमजोर है, फिर भी स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं हैं क्योंकि हम अपने पूरे जीवनकाल में बीपीए के निम्न स्तर के संपर्क में रहते हैं।

कुछ देशों ने एहतियात के तौर पर शिशु के लिए उपयोग होने वाली बोतलों में बीपीए पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऑस्ट्रेलिया स्वेच्छा से इसे धीरे-धीरे शिशु बोतलों से हटा रहा है।

ऑटिज्म क्या है और इसके क्या कारण हैं?

ऑटिज्म एक तंत्रिका विकास से जुड़ा विकार है जिसका पता सामाजिक संचार में कठिनाई और दोहराव या प्रतिबंधात्मक व्यवहार के आधार पर लगाया जाता है।

ऑटिज्म से पीड़ित लोगों को अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे दौरे पड़ना, ‘मोटर कार्यों’ में परिवर्तन (उदाहरण के लिए, पेंसिल पकड़ने या दरवाजा खोलने के लिए चाबी घुमाने में समस्या आना), चिंता, नींद की समस्याएं और पेट की गड़बड़ी।

अब तक के अधिकांश अध्ययनों में ऑटिज्म से पीड़ित ऐसे लोगों का वर्णन किया गया है जो समुदाय में बहुत अच्छी तरह से बातचीत करने में सक्षम हैं, और वास्तव में कुछ क्षेत्रों में उत्कृष्ट कौशल प्रदर्शित कर सकते हैं। लेकिन, बड़ी संख्या में गंभीर रूप से पीड़ित लोगों के बारे में हमारे ज्ञान में एक बड़ा अंतर है, जिन्हें 24 घंटे देखभाल की आवश्यकता होती है।

ऑटिज्म में आनुवंशिकी का बहुत प्रभाव होता है, जिसके साथ 1,000 से अधिक जीन जुड़े होते हैं। लेकिन हम नहीं जानते कि ज्यादातर मामलों में ऑटिज्म का कारण क्या होता है।

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए विस्तृत जीन अनुक्रमण करना मानक अभ्यास नहीं है। हालांकि, कुछ प्रकार के ऑटिज्म के लिए स्पष्ट रूप से कुछ व्यक्तिगत जीन जिम्मेदार हैं, लेकिन अक्सर ऑटिज्म कई जीन की जटिल परस्पर क्रिया का परिणाम हो सकता है जिसका पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

पर्यावरणीय कारक भी ऑटिज्म के विकास में योगदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ ‘एंटीसीजर’ दवाएं अब गर्भवती महिलाओं को नहीं दी जाती हैं क्योंकि उनके बच्चों में ऑटिज्म जैसे तंत्रिका विकास से जुड़े विकार विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

यह नवीनतम अध्ययन एक अन्य संभावित पर्यावरणीय कारक पर नजर डालता है, जो गर्भ में बीपीए के संपर्क में आने से संबंधित है। शोध के कई भाग थे, जिनमें मनुष्यों और चूहों पर किए गए अध्ययन शामिल थे।

शोध में मनुष्यों में क्या पाया गया?

शोधकर्ताओं ने 1,074 ऑस्ट्रेलियाई बच्चों के एक समूह का अध्ययन किया, जिनमें से लगभग आधे लड़के थे। उन्होंने पाया कि 43 बच्चों (29 लड़के और 14 लड़कियां) में सात से 11 वर्ष की आयु (औसत आयु नौ वर्ष) तक में ऑटिज्म के बारे में पता लग चुका था।

शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के अंतिम चरण में 847 माताओं के मूत्र के नमूने एकत्र किये और बीपीए की मात्रा मापी। फिर उन्होंने बीपीए के उच्चतम स्तर वाले नमूनों पर अपना विश्लेषण केंद्रित किया।

उन्होंने जन्म के समय गर्भनाल से रक्त का विश्लेषण करके जीन परिवर्तनों को भी मापा। यह ‘एरोमाटेज एंजाइम गतिविधि’ की जांच करने के लिए था, जो एस्ट्रोजन के स्तर से जुड़ा हुआ है। जिन बच्चों में जीन परिवर्तन हुआ और जो एस्ट्रोजन हार्मोन के निम्न स्तर का संकेत दे सकता है, उन्हें ‘कम एरोमाटेज गतिविधि’ के रूप में वर्गीकृत किया गया।

शोधकर्ताओं ने उच्च बीपीए स्तर वाली माताओं और कम ‘एरोमाटेज गतिविधि’ वाले लड़कों में ऑटिज्म के अधिक जोखिम के बीच संबंध पाया।

अंतिम विश्लेषण में, शोधकर्ताओं ने कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित तथा एरोमाटेज के निम्न स्तर वाली लड़कियों की संख्या बहुत कम थी, जिनका विश्लेषण किया जा सके।

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 10, 2024 04:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).