देश की खबरें | डीएमके ने विद्युत विधेयक को संघीय ढांचे के खिलाफ करार दिया, प्रधानमंत्री से वापस लेने की अपील की
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चेन्नई, 28 मई डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 को वापस लिए जाने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि यह राज्यों के अधिकारों का ''अतिक्रमण'' करता है और ''संघीय ढांचे के नियमों के खिलाफ है।''

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्टालिन ने कहा कि नि:शुल्क बिजली आपूर्ति तमिलनाडु की आर्थिक उन्नति का मुख्य स्तंभ है, जो कि लाखों किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही खाद्य महंगाई दर पर अंकुश लगाता है।

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उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 के जरिए नि:शुल्क बिजली आपूर्ति की नीति को समाप्त करने से '' हमारे लाखों किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।''

डीएमके नेता ने दावा किया कि महामारी के इस समय में और इसके आर्थिक नतीजों के मद्देनजर यह फैसला ना केवल ''गैर जिम्मेदाराना'' है बल्कि वर्तमान संकट से ध्यान भटकाने जैसा भी है।

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उन्होंने कहा कि संविधान के मुताबिक, बिजली के दाम और इस पर लगने वाला कर राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए विधेयक के कुछ प्रावधान राज्य विधानसभा के अधिकारों का अतिक्रमण करने वाले हैं।

स्टालिन ने किसानों के हितों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री से विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 को वापस लिए जाने की अपील भी की।

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