देश की खबरें | दिवाली: दिल्ली के कनॉट प्लेस में लगा 'स्मॉग टावर' भी सांस लेने लायक हवा नहीं दे सका

नयी दिल्ली, पांच नवंबर दिल्ली के कनॉट प्लेस में हाल में लगा 'स्मॉग टावर' भी दिवाली की रात आसपास के निवासियों को सांस लेने लायक हवा नहीं दे सका क्योंकि धड़ल्ले से पटाखे फोड़े जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ''गंभीर'' श्रेणी के करीब पहुंच गया।

बृहस्पतिवार रात नौ बजे 24 फुट ऊंचे इस वायु शोधक के 'इनलेट' में पीएम2.5 प्रदूषक की सांद्रता 642 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि 'आउटलेट' में 453 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई।

इसी अवधि में 'स्मॉग टावर' पीएम10 प्रदूषक के स्तर को 649 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 511 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर कर सका।

फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले महीन कण यानी पीएम2.5 और पीएम10 की सुरक्षित सीमा क्रमश: 60 माइकोग्राम प्रति घन मीटर और 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होती है।

इससे पहले, सुबह नौ बजे 'स्मॉग टावर' पीएम2.5 प्रदूषक की सांद्रता घटाकर 538 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 261 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर कर सका। वहीं, पीएम10 प्रदूषक के स्तर को 603 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 288 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर कर सका।

वहीं, 'स्मॉग टावर' के आंकड़ों से जुड़े सवालों पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय के कार्यालय से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि 'स्मॉग टावर' भी एक निश्चित स्तर तक प्रदूषण को कम कर सकते हैं।

'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' के सुनील दहिया ने कहा कि सभी पर्यावरणविद और वैज्ञानिक लगातार कहते रहे हैं कि वैश्विक स्तर पर इस तरह के कोई सिद्ध रिकॉर्ड या आंकड़े नहीं हैं जो ये स्थापित करते हों कि 'स्मॉग टावर' प्रभावी हैं।

उन्होंने कहा, '' कनॉट प्लेस में किया गया ये परीक्षण दर्शाता है कि स्मॉग टावर कभी भी वायु प्रदूषण का समाधान नहीं हो सकते। इस तरह की किसी भी अवसंरचना पर पैसा बर्बाद किए जाने पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।''

उल्लेखनीय है कि 23 अगस्त को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 'स्मॉग टावर' का उद्घाटन किया गया था जोकि अपने चारों ओर एक किलोमीटर के दायरे में प्रति सेकेंड लगभग 1,000 प्रति घन मीटर की दर से हवा को शुद्ध कर सकता है।

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