नयी दिल्ली, 22 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि दिव्यांग लोगों को “अनंतकाल से” कल्याणकारी योजनाओं से बाहर रखा गया है और इसमें “कोई बहस नहीं” कि उन्हें हाशिये पर रखा गया।
अदालत ने केंद्र से कहा कि वह इन लोगों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर राशन उपलब्ध कराने पर विचार करे।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा, “समस्या यह है कि उन्हें अनंतकाल से (कल्याणकारी) योजनाओं से बाहर रखा गया है। अगर केंद्र को इस बात की जानकारी नहीं है तो हम उसे इस बारे में जागरुक करेंगे।”
अदालत ने कहा, “इस तथ्य पर किसी बहस की गुंजाइश नहीं कि दिव्यांग व्यक्ति हर योजना में हाशिये पर पहुंच जाते हैं। ”
पीठ ने यह टिप्पणी एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की जिसमें केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह यह सुनिश्चित करे कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रधानमंत्री अन्न कल्याण योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का फायदा कोविड-19 महामारी के दौरान दिव्यांग लोगों को भी पहुंचाएं।
याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह शुरू में दिव्यांगों को उनके दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर एक महीने का राशन उपलब्ध कराने पर विचार करे और ऐसा करने के दौरान उनके सभी विवरण ले जो उन्हें राशन-कार्ड जारी करने के लिये जरूरी होगा।
अदालत ने कहा कि बाद में जब दिव्यांग व्यक्ति राशन के लिये आएंगे तो उनके पास राशन कार्ड होगा जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत अनाज बांटने के लिये जरूरी है।
केंद्र सरकार की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा ने अदालत को बताया कि वह सुझावों के संदर्भ में निर्देश लेंगी और इस पर पीठ ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 29 जुलाई को तय कर दी।
याचिकाकर्ता एनजीओ नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड की तरफ से पेश हुए वकील संतोष कुमार रुंगटा ने कहा कि जब विभिन्न खाद्य सुरक्षा उपायों को लागू किया जा रहा था तब दिव्यांगों की अनदेखी हुई क्योंकि उनमें से अधिकांश के पास राशन कार्ड नहीं है।
केंद्र ने एक हलफनामे में कहा कि हर किसी को राशन कार्ड जारी किया जा रहा है और यह साबित करने का दायित्व दिव्यांग व्यक्तियों का है कि वह इसे प्राप्त करने में सक्षम नहीं थे।
पीठ ने केंद्र के इस रुख से इत्तेफाक न जताते हुए कहा, “हलफनामे का सार और लहजा चौंकाने वाला था।”
अदालत ने कहा, “यह दायित्व दिव्यांग व्यक्तियों का नहीं कि वे राशन कार्ड नहीं प्राप्त कर सके। यह दिखाने का दायित्व सरकार का है कि सभी को राशन कार्ड उसने उपलब्ध कराया है।”
पीठ ने कहा, “समस्या यह है कि आप (केंद्र) इसे अलग से नहीं देख रहे हैं।”
अदालत ने एनजीओ से इस मामले में दिल्ली सरकार को भी पक्ष बनाने को कहा है।
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