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Haryana Assembly Elections 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौती बने 'असंतुष्ट नेता’

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस से टिकट पाने के इच्छुक कई उम्मीदवार अपनी अपनी पार्टियों द्वारा मौका नहीं दिए जाने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं और ‘किंगमेकर’ के रूप में उभरने के लिए जोरदार चुनाव-प्रचार कर रहे हैं.

Haryana Assembly Elections 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौती बने 'असंतुष्ट नेता’
BJP and Congress (img: Wikimedia commons)

नयी दिल्ली, 19 सितंबर : हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस से टिकट पाने के इच्छुक कई उम्मीदवार अपनी अपनी पार्टियों द्वारा मौका नहीं दिए जाने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं और ‘किंगमेकर’ के रूप में उभरने के लिए जोरदार चुनाव-प्रचार कर रहे हैं. दोनों पार्टियां उनमें से कुछ उम्मीदवारों को अपना नामांकन वापस लेने के लिए मनाने में कामयाब रहीं, हालांकि बड़ी संख्या में ये ‘असंतुष्ट’ नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. हरियाणा विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वालों में सबसे प्रमुख चेहरा एशिया की सबसे अमीर महिला और ओ. पी. जिंदल समूह की अध्यक्ष सावित्री जिंदल हैं. वह हरियाणा के मंत्री और हिसार से मौजूदा विधायक कमल गुप्ता के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं. जिंदल (74) ने नामांकन पत्र भरने के बाद कहा, ‘‘जिंदल परिवार ने हमेशा हिसार की सेवा की है. मैं जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने और उनके विश्वास को कायम रखने के लिए पूरी तरह समर्पित हूं. यह मेरा आखिरी चुनाव है और मैं हिसार की जनता के अधूरे कामों को पूरा करने का मौका चाहती हूं.’’

जिंदल कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर हिसार सीट से साल 2005 और 2009 में विधायक चुनी गईं. 2013 में उन्हें भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाया गया था. सावित्री जिंदल के बेट नवीन जिंदल जब भाजपा में शामिल हो गए थे तो उन्होंने भी मार्च में कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ लिया था. जिंदल को इस बार भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जब सावित्री जिंदल से उनके बेटे के कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद बने रहने के बावजूद बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया तो जिंदल ने दावा किया, ‘‘वह आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं हुई थीं और उन्होंने केवल अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया था.’’ पूर्व विद्युत मंत्री रणजीत सिंह चौटाला भाजपा द्वारा टिकट देने से इनकार किए जाने के बाद सिरसा जिले के रानिया से एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के बेटे रणजीत चौटाला ने टिकट नहीं मिलने पर कैबिनेट मंत्री के पद से भी इस्तीफा दे दिया. यह भी पढ़ें : भाजपा विधायक मुनिरत्ना और छह अन्य पर बलात्कार, यौन उत्पीड़न और धमकी का मामला दर्ज

पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के विश्वासपात्र निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद अंबाला छावनी से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं. सरवारा का मुकाबला भाजपा के अनिल विज (छह बार के विधायक और राज्य के पूर्व गृह मंत्री) तथा कांग्रेस के परविंदर सिंह परी से है. भाजपा की हरियाणा ईकाई के व्यापार प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक नवीन गोयल पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर भाजपा से अलग हो गए और वह गुरुग्राम से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. गोयल ने 'पीटीआई-' से कहा, ‘‘हरियाणा में बूथ, मंडल और जिला स्तर के कई प्रमुख पदाधिकारी टिकट नहीं मिलने के कारण भाजपा छोड़ चुके हैं और आगामी चुनाव में इसका पार्टी की स्थिति पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा. मैं लगभग 15 साल से गुरुग्राम के लिए काम कर रहा हूं और पार्टी द्वारा इस निर्वाचन क्षेत्र से एक बाहरी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने से मतदाता भी नाराज हैं.’’

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 19, 2024 12:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).