देश की खबरें | अभी तक जारी बर्फवारी से कीड़ा जड़ी इकट्ठा करने वाले ग्रामीणों में मायूसी

पिथौरागढ़, 28 अप्रैल इस साल उत्तराखंड में अभी तक जारी बर्फबारी ने जौहर और दारमा घाटियों के लगभग 30 गांवों में लोगों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है जो ऊंचाई वाले घास के मैदानों में पायी जाने वाली कीड़ा जड़ी (कैटरपिलर कवक) या यारसा गुम्बा को इकट्ठा करके उसे नेपाली बिचौलियों को बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं।

घास के मैदान अब भी बर्फ से ढके हुए हैं और इस कारण इन गांवों के 3000 से अधिक निवासियों के लिए ऊंचाई पर चढ़ना और वहां डेरा डालना असंभव हो गया है। अभी तक वे हर साल मार्च में कीड़ा-जड़ी इकट्ठा करते थे और उन्हें नेपाली बिचौलियों को बेचते थे। जड़ी-बूटी के औषधीय गुणों की अच्छी मांग के मद्देनजर ये नेपाली व्यापारी उन्हें तिब्बत ले जाते हैं।

यह कीड़ा जड़ी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है।

बर्फ पिघलने का इंतजार कर रहे मुनस्यारी के गोलफा गांव के सरपंच तेज सिंह ने कहा, "सामान्यत: मार्च के मध्य तक 9000 से 14000 फीट पर स्थित घास के मैदानों पर जमा बर्फ पिघल जाती है और क्षेत्र के ग्रामीण कीड़ा-जड़ी काट लेते हैं लेकिन इस साल बर्फबारी अप्रैल के अंत तक जारी है ​जिससे कीड़ा जड़ी इकट्ठा करना असंभव हो गया है।"

उन्होंने कहा, "इस महीने में पिछले 26 दिनों में ही नौ बार बर्फबारी हुई है। घास के मैदानों में दो से लेकर पांच फीट तक बर्फ जमी हुई है जिसके निकट भविष्य में पिघलने की संभावना नहीं है।"

मुनस्यारी कस्बे के एक होटल व्यवसायी पूरन पांडे ने कहा, "ग्रामीण 90 दिनों तक घास के मैदानों में शून्य से नीचे के तापमान में रहते हैं और लगभग 90 से 150 किलोग्राम कीड़ा जड़ी इकट्ठा कर लेते हैं। यह कीड़ा जड़ी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 15 से 20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बिकती है।"

सिंह ने कहा, "अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो ग्रामीणों को बड़ा नुकसान होगा क्योंकि मानसून की शुरुआत के साथ ही यह जड़ी-बूटी सड़ जाती है।"

सं दीप्ति

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