जरुरी जानकारी | सौर सेल पर रक्षोपाय शुल्क को लेकर व्यापार उपचार महानिदेशालय ने बुलायी बैठक

नयी दिल्ली, 29 जून वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई डीजीटीआर ने सौर सेल के अयात पर रक्षोपाय शुल्क जारी रखने के लिये जांच को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को मौखिक सुनवाई के लिए संबंधित पक्षों की बैठक बुलायी है।

मूंदड़ा सोलर पीवी, जूपिटर सोलर पावर और जूपिटर इंटरनेशनल ने इंडिया सोलर मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (इसमा) के जरिये इस साल मार्च में रक्षोपाय शुल्क (सेफगार्ड ड्यूटी) की समीक्षा और उसे आगे भी लागू करने के बारे में आवेदन दिये थे।

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कंपनियों ने घरेलू विनिर्माताओं के हितों की रक्षा के लिये सौर सेल के आयात पर रक्षोपाय शुल्क जारी रखने की मांग की है।

उन्होंने सरकार से और चार साल के लिये रक्षोपाय शुल्क लगाने का आग्रह किया है।

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भारत ने 30 जुलाई 2018 को दो साल के लिये रक्षोपाय शुल्क लगाया था। इसकी अवधि जुलाई के अंत में समाप्त हो रही है।

व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने कहा, ‘‘मौखिक सुनवाई 11 जून 2020 को वीडियो कांफ्रेंन्सिंग के जरिये प्रस्तावित थी लेकिन कुछ कारणों से इसे टाल दिया गया। अब यह सुनवाई तीन जुलाई को होगी।’’

इस बीच, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कुछ सौर उपकरणों पर सीमा शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है।

प्रस्ताव के तहत एमएनआरई ने इस साल 30 जुलाई से सौर मॉड्यूल, सौर सेल और सौर इनवर्टर पर क्रमश: 25 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की दर से मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाने का प्रस्ताव किया है, जिसे एक अप्रैल 2022 से क्रमश: 40 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

भारत में आयातित सौर मॉड्यूल में चीन की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है। सौर मोड्यूल और सेल पर अभी 15 प्रतिशत रक्षोपाय शुल्क लगता है।

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