जरुरी जानकारी | डीईआरसी ने इस्तेमाल नहीं हुये बिजली लोड पर निर्धारित शुल्क घटाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के उद्योगों और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को राहत देते हुये दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने लॉकडाउन के दौरान इस्तेमाल नहीं की गई विद्युत क्षमता के लिये निर्धारित शुल्क को कम करने का आदेश दिया है।

नयी दिल्ली, सात सितंबर दिल्ली के उद्योगों और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को राहत देते हुये दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने लॉकडाउन के दौरान इस्तेमाल नहीं की गई विद्युत क्षमता के लिये निर्धारित शुल्क को कम करने का आदेश दिया है।

इस लिहाज से उद्योगों और गैर- घरेलू (वाणिज्यिक) उपभोक्ताओं को उनके मंजूरी प्राप्त लोड अथवा अनुबंध के मुताबिक इस्तेमाल नहीं की क्षमता पर अप्रैल और मई माह के लिये निर्धारित शुल्क को घटाकर 125 रुपये कर दिया गया है।

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में दिल्ली के उद्योगपतियों और व्यापारियों को लॉकडाउन के दौरान इस्तेमाल नहीं हुई क्षमता पर निर्धारित शुल्क से राहत देने का आवश्वासन दिया था।

केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ‘‘संकट की इस घड़ी में दिल्ली सरकार दिल्ली के लोगों के साथ खड़ी है। बिजली के निर्धारित शुल्क में दी गई इस राहत से कोरोना के कारण कठिनाई झेल रहे लाखों लोगों को मदद मिलेगी।’’

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दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येन्द्र जैन ने भी इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से गैर-घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भारी राहत मिलेगी। इस छूट से करीब 160 करोड़ रुपये तक का प्रभाव होगा। इससे 44 हजार औद्योगिकी और 10 लाख के करीब गैर- घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को फायदा होगा।

दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने कहा इस राहत की पात्र औद्योगिक इकाइयों और वाणिज्यिक प्रतिठान उपभोक्ताओं को अप्रैल और मई 2020 के दौरान अनुबंधित मांग अथवा मंजूर विद्युत लोड --एमडीआई पर निर्धारित शुल्क मौजूदा 250 रुपये प्रति किलोवॉट के बजाय अब 125 रुपये प्रति किलोवॉट प्रति माह की दर पर लिया जायेगा।

दिल्ली सरकार के वक्तव्य के मुताबिक अप्रैल और मई के दौरान कुल इस्तेमाल नहीं की गई क्षमता 80 प्रतिशत तक रही। इसमें 84 प्रतिशत गैर-घरेलू उपभोक्ता और 75 प्रतिशत औद्योगिक उपभोक्ता आवंटित क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाये।

डीईआरसी का मानना है कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान 30 मई तक ज्यादातर वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और औद्योगिकी उपभोक्ता अपनी अनुबंधित बिजली क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाये।

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