देश की खबरें | 'लोकतंत्रीकरण' ने देश के दूर-दराज के हिस्सों के अभ्यर्थियों की आईएएस बनने में मदद की : जितेंद्र सिंह

केवडिया (गुजरात), तीन नवंबर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने की सामग्री तक प्रौद्योगिकी-आधारित पहुंच के कारण सिविल सेवाओं के "लोकतंत्रीकरण" ने भारत के दूरदराज के हिस्सों के अभ्यर्थियों की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं में स्थान पाने में मदद की है।

लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (एलबीएसएनएए) के 98वें फाउंडेशन कोर्स में भारतीय प्रशासनिक सेवा के परिवीक्षकों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि मोबाइल फोन और इंटरनेट ग्रामीण इलाकों में पहुंच रहा है, जिससे हर किसी के लिए ज्ञान सुलभ हो पा रहा है और इसका सबसे ज्यादा श्रेय प्रौद्योगिकी को जाता है।

इस फाउंडेशन कोर्स के तहत भारत की 16 सिविल सेवाओं और भूटान की तीन सिविल सेवाओं के 560 अधिकारी प्रशिक्षुओं का प्रशिक्षण केवडिया में आयोजित किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा, "पूरी सिविल सेवा की जनसांख्यिकी बदल गई है, - अब आपके पास पंजाब, हरियाणा से टॉपर्स हैं, यहां तक कि इस साल तीन लड़कियां भी हैं, वे सभी उत्तर भारत से हैं, पहले यह कुछ राज्यों तक ही सीमित था।''

कार्मिक मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में तैयारी सामग्री तक प्रौद्योगिकी-आधारित पहुंच बढ़ने के कारण सिविल सेवाओं और अन्य क्षेत्रों का एक तरह से "लोकतंत्रीकरण" हुआ है, जिसने हाल ही में भारत के दूरदराज के हिस्सों के अभ्यर्थियों को भी आईएएस और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं में जगह बनाने में सक्षम बनाया है।

सिंह ने कहा कि पिछले 9-10 वर्षों में, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने शासन और प्रशासनिक अधिकारियों को तैयार करने में "सावधानीपूर्वक बुनियादी बदलाव" किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक रूप से, "प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली से इतर भारत की पहचान बनाई है और अब देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

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