त्रिशूर (केरल), 10 अप्रैल केरल देवस्वोम भर्ती बोर्ड (केडीआरबी) के अध्यक्ष के बी मोहनदास ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रसिद्ध कूडलमाणिक्यम मंदिर में ‘कझाकम’ (मंदिर अनुष्ठान कर्मी) की नियुक्तियों के संबंध में ‘तंत्रियों’ (मुख्य पुजारियों) द्वारा जातिगत वरीयता की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मोहनदास ने कहा कि केवल कानून द्वारा अनिवार्य सामुदायिक आरक्षण ही लागू किया जाएगा।
मंदिर के एक कर्मी के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि इस्तीफा देने वाले कर्मचारी की नियुक्ति खुली श्रेणी के तहत की गई थी और अगली नियुक्ति सामुदायिक आरक्षण श्रेणी के तहत होगी।
देवस्वोम भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष की प्रतिक्रिया इन खबरों के मद्देनजर आई है कि बोर्ड ने मंदिर के ‘कझाकम’ के इस्तीफे के बाद अगली नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मोहनदास ने कहा, ‘‘देवस्वोम बोर्ड को नियुक्ति आदेश तुरंत जारी करना चाहिए और इसमें किसी भी देरी का कोई कारण नहीं है।’’
इससे पहले, देवस्वोम भर्ती बोर्ड द्वारा ‘कझाकम’ के कार्यों के लिए नियुक्त किए गए एझावा समुदाय के सदस्य बालू ने पिछले सप्ताह देवस्वोम प्रशासक को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
उन्होंने जातिगत भेदभाव के आरोपों के बाद व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था।
‘कझाकम’ मंदिर में पदानुक्रम के साथ एक विशिष्ट समूह को संदर्भित करता है जिसे माला तैयार करने और अन्य रस्में अदा करने का काम सौंपा जाता है।
मंदिर की नौकरी से एझावा समुदाय के व्यक्ति के इस्तीफे ने एक बार फिर राज्य में, खासकर मंदिरों में मौजूद कथित जातिगत भेदभाव के मुद्दे को सामने ला दिया है।
हालांकि, सूत्रों ने कहा कि अगली नियुक्ति भी एझावा समुदाय से की गई है।
मोहनदास ने कहा कि प्रशासक ने देवस्वोम प्रशासनिक समिति को सूचित किए बिना ही बालू का तबादला कर उन्हें कार्यालय के काम के लिए नियुक्त कर दिया।
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