नयी दिल्ली,17 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को अपने समक्ष उपस्थित होने और लंबित बकाये का भुगतान करने संबंधी एक अदालत के आदेश के बावजूद कई महीनों तक बोर्ड के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिये जाने के कारण बताने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड इम्पलॉइज की याचिका बहुत बुरी स्थिति को बयां करती है क्योंकि कर्मचारियों को करीब नौ महीनों से उनका वेतन नहीं मिला है।
न्यायाधीश ने कहा कि अधिकारी कर्मचारियों की दशा के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हैं, जो बहुत मुश्किल से गुजारा कर रहे हैं।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया, अदालती आदेशों का नहीं के बराबर सम्मान किया जा रहा है, क्योंकि सुनवाई की पिछली तारीख पर आश्वस्त किये जाने के बावजूद इस बारे में कोई निश्चितता नहीं है कि वेतन कब दिया जाएगा। न्यायाधीश ने कहा कि अब यह कहा जा रहा है कि विषय पर विचार किया जा रहा है और कोष की कमी है।
विषय के आलोक में, इस अदालत का यह मानना है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी/प्रतिवादी संख्या-1 (दिल्ली वक्फ बोर्ड) को सुनवाई की अगली तारीख 11 जुलाई 2023 को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश देना उपयुक्त होगा। ताकि, वह इस अदालत के आदेशों का कथित तौर पर पालन नहीं करने और दिल्ली वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों को वेतन-भत्ते देने के सांविधिक दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के बारे में बता सकें।
अदालत ने एक जून को जारी अपने आदेश में यह कहा।
याचिकाकर्ताओं ने एक कर्मचारी के साथ इस साल की शुरूआत में अदालत का रुख कर दावा किया था कि उन्हें पिछले साल अक्टूबर से वेतन नहीं मिला है और वित्तीय तंगी का सामना कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 27 मार्च को जारी अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एम सुफियान ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि पीड़ित कर्मचारियों को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकारों से वंचित कर दिया गया है।
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