नयी दिल्ली, 20 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान एक स्थानीय निवासी की हत्या से जुड़े मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर उसे जमानत दी गयी तो आशंका है कि वह अपने क्षेत्र में रहे रहे गवाहों को धमका सकता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने बृजपुरी इलाके में मोनिस की हत्या के मामले में प्रदीप राय की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत ने 18 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि मामला संवेदनशील प्रकृति का है और आरोपी के खिलाफ गंभीर किस्म के आरोप हैं।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह बहुत संवेदनशील प्रकृति का मामला है । आशंका है कि याचिकाकर्ता (राय) उन गवाहों को धमका सकता है, जिनकी अभी गवाही होनी बाकी है । उसी क्षेत्र में रहने के कारण इस आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता । ’’
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उन्होंने कहा, ‘‘संपूर्णता में मामले के तथ्यों और परिस्थिति पर विचार करते हुए मैं इसे जमानत प्रदान करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं मानता हूं । इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।’’
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक मनोज चौधरी ने जमानत याचिका का विरोध किया । उन्होंने कहा कि मामले में एक चश्मदीद ने राय को उस भीड़ का हिस्सा बताया है, जिसने लाठियों और तलवारों से मोनिस पर हमला किया और जैसे ही पता चला कि वह मुस्लिम समुदाय से है तो उसपर पथराव भी किया गया।
लोक अभियोजक ने कहा कि इस गवाह ने आगे कहा है कि मोनिस ने भागने की कोशिश की लेकिन वहीं गिर पड़ा और बाद में बृजपुरी में तैनात पुलिस कर्मी ने उसे बचाया और अस्पताल भेजा ।
राय की तरफ से पेश वकील आकाश वर्मा ने अदालत से कहा कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारियों ने आरोपी को घर से खींचकर निकाला और इस मामले में उसे गलत तरीके से फंसाया गया।
वकील ने कहा कि राय टैक्सी ड्राइवर है और उसका अतीत भी बेदाग रहा है ।
वकील ने आगे आरोप लगाया कि अभियोजन के दो गवाहों को गवाह के तौर पर ‘गढ़ा’ गया है ।
अभियोजन ने कहा कि दंगे के दौरान पीसीआर को मिली कॉल की छानबीन के दौरान एक कॉलर की पहचान शशिकांत के तौर पर हुई जिसने क्षेत्र में दंगा भड़कने और मोनिस समेत कुछ लोगों की मौत को लेकर कई बार कॉल की थी।
चौधरी ने कहा कि शशिकांत ने अपने बयान में साफ तौर पर राय समेत अन्य का नाम लिया जिन्होंने पीड़ितों से मारपीट की और उनके मोबाइल फोन छीन लिए ।
लोक अभियोजक ने कहा कि इसके अलावा पांच पुलिस अधिकारियों ने भी राय की पहचान भीड़ में शामिल शख्स के तौर पर की जिसने कथित तौर पर मोनिस की हत्या कर दी ।
अभियोजन के मुताबिक 25 फरवरी को मोनिस अपने पिता के घर से लौट रहे थे । जब वह यमुना विहार बस स्टैंड पहुंचे तो पता चला कि दंगा भड़क गया है ।
भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की । बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गयी।
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