नयी दिल्ली, 21 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानीवासियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर दूध की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की उपराज्यपाल और पुलिस आयुक्त को ‘सलाह’ देने संबंधी एक जनहित याचिका की सुनवाई से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि कोई भी कानून अदालत को उपराज्यपाल को ‘सलाह’ देने के लिए अधिकृत नहीं करता।
अदालत ने पेशे से वकील याचिकाकर्ता से कहा, ‘‘किस अधिकार क्षेत्र के तहत उच्च न्यायालय उपराज्यपाल को सलाह दे सकता है? मैंने संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं देखा है, जो उपराज्यपाल को इस तरह की सलाह देने के लिए उच्च न्यायालय को अधिकृत करता हो।’’
खबरों पर भरोसा जताते हुए महिला याचिकाकर्ता ने जोर दिया कि ‘‘पशु पॉलिथीन खाते हैं और सड़क पर मर रहे हैं।’’
याचिका में कहा गया है कि पशुओं की उपेक्षा किये जाने, उन्हें आवारा छोड़ देने और उनकी दयनीय स्थिति के कारण दिल्लीवासियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम रिपोर्ट के आधार पर अपना फैसला नहीं देते हैं। हम अपनी हद जानते हैं।
अदालत ने याचिकाकर्ता पर ‘भारी जुर्माना’ लगाने के संकेत दिये, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।
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