नयी दिल्ली, 16 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने अपनी तलाक याचिका खारिज करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपनी अपील पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जल्द सुनवाई के लिए अब्दुल्ला से अलग रह रहीं उनकी पत्नी की सहमति भी आवश्यक है।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के महापंजीयक पहले ही एक परिपत्र जारी कर कह चुके हैं कि कोविड-19 की वजह से अदालतों में सीमित काम होने के चलते लंबित मामलों की अंतिम सुनवाई के आग्रह पर केवल तभी विचार होगा जब दोनों पक्ष सहमत हों।
पीठ ने कहा, ‘‘इस तथ्य के मद्देनजर कि आवेदन में न तो दूसरे पक्ष (पायल अब्दुल्ला) की कोई सहमति है और न ही प्रतिवादी के वकील सुनवाई में मौजूद हैं, यद्यपि हमें सूचित किया गया है कि उन्हें आवेदन की एक अग्रिम प्रति दी गई थी, हम आवेदन में किए गए आग्रह को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हैं।’’
इसने कहा, ‘‘आवेदन खारिज किया जाता है।’’
उमर के वकील ने अदालत से कहा कि दूसरे पक्ष की ओर से सहयोग के अभाव की वजह से आवेदन दायर किया गया है।
निचली अदालत ने 30 अगस्त 2016 को पायल से तलाक मांगने की उमर की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह यह साबित करने में विफल रहे हैं कि शादी तोड़ना अपरिहार्य हो गया है।
इसने कहा था कि उमर ‘‘क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए अपने मामले को साबित करने में विफल रहे हैं।’’
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