नयी दिल्ली, 20 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि गिरफ्तारी का आधार लिखित रूप में बताना ‘‘अनिवार्य और निर्विवाद’’ है और उसने प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन ‘यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ (यूएनएलएफ) के स्वयंभू सेना प्रमुख थोकचोम श्यामजय सिंह और अन्य की गिरफ्तारी को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने पंकज बंसल, प्रबीर पुरकायस्थ और विहान कुमार मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 22(1) पर आधारित हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित रूप में गिरफ्तारी का आधार बताना अनिवार्य और निर्विवाद है, भले ही गिरफ्तारी पीएमएलए या यूएपीए या किसी अन्य आपराधिक कानून के तहत की गई हो।’’
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इसके अलावा, संविधान के अनुच्छेद 22(1) की आवश्यकताओं के अनुपालन को साबित करने की जिम्मेदारी हमेशा जांच एजेंसी पर रहती है।’’
अनुच्छेद 22(1) में प्रावधान है कि गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को ‘‘ऐसी गिरफ्तारी के कारणों के बारे में यथाशीघ्र सूचित किए बिना हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए और न ही उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और बचाव करने के अधिकार से वंचित किया जाना चाहिए।’’
सिंह को राहत प्रदान करते हुए अदालत ने संगठन के स्वयंभू खुफिया विभाग के प्रमुख ‘लेफ्टिनेंट कर्नल’ लाइमायम आनंद शर्मा और संगठन के सदस्य इबोम्चा मेइती की गिरफ्तारी को भी रद्द कर दिया, जिन्हें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) मणिपुर से गिरफ्तार करके दिल्ली लाया था।
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