देश की खबरें | दिल्ली आबकारी मामलाः न्यायालय ने व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली की अंतरिम जमानत बढ़ाई

नयी दिल्ली, 13 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में हैदराबाद के व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि मंगलवार को बढ़ा दी।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू के उपलब्ध नहीं होने के कारण मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।

बोइनपल्ली की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को अक्टूबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने अपने मुवक्किल को जमानत देने का अनुरोध करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया के मामले का जिक्र किया।

सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से पेश वकील जोहेब हुसैन ने शीर्ष अदालत को बताया कि बोइनपल्ली अपनी बीमार पत्नी की तबीयत के कारण छह मार्च से अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं। उन्होंने न्यायालय से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की उपस्थिति में मामले पर सुनवाई करने का आग्रह किया।

इसके बाद शीर्ष अदालत ने बोइनपल्ली की अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाते हुए मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर तक टाल दी, क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल उपलब्ध नहीं थे।

गत 20 मार्च को न्यायालय ने कहा था कि बोइनपल्ली पिछले 18 महीने से हिरासत में हैं और उन्हें पांच हफ्ते के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।

अंतरिम जमानत देते हुए शीर्ष अदालत ने बोइनपल्ली को अपना पासपोर्ट जमा करने और हैदराबाद की यात्रा के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) नहीं छोड़ने का निर्देश दिया था।

बोइनपल्ली ने दिल्ली उच्च न्यायालय के तीन जुलाई 2023 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत 2022 में धन शोधन मामले में उसकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी से उपजा है, जो दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा आबकारी नीति के निर्माण एवं कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच की सिफारिश किए जाने के बाद दर्ज की गई थी।

आरोप है कि बोइनपल्ली गुप्त बैठकों का हिस्सा था और शराब का कारोबार करने वाले एक अन्य आरोपी समीर महेंद्रू के साथ धन शोधन की साजिश में शामिल था।

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