देश की खबरें | दिल्ली आयोग ने ‘भेदभावकारी’ दिशानिर्देश पर इंडियन बैंक को समन जारी किया

नयी दिल्ली, 18 जुलाई दिल्ली महिला आयोग ने महिलाओं की भर्ती को लेकर "भेदभावपूर्ण" दिशानिर्देशों को वापस लेने से कथित रूप से इनकार करने पर इंडियन बैंक को समन जारी किया है।

आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भी पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

जून के अंत में, आयोग ने मीडिया में आईं उन खबरों का स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें बताया गया था कि बैंक ने इस तरह के दिशानिर्देश जारी किए हैं जो तीन महीने से अधिक गर्भवती महिलाओं को "अस्थायी रूप से अनफिट’ मानता है और ऐसी महिलाओं को चयन होने पर उन्हें तत्काल नौकरी में शामिल नहीं किया जाएगा।

नोटिस में कहा गया है, “ इससे उनके नौकरी में शामिल होने में देरी होगी और उन्हें वरिष्ठता का नुकसान होगा।”

इसके जवाब में, इंडियन बैंक ने आयोग को सूचित किया कि उसने ऐसा कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया था। उसने कहा कि उसने डीओपीटी के पहले से मौजूद दिशानिर्देशों पर अमल किया है।

हालांकि, आयोग ने कहा कि 1958 में जारी उक्त दिशा-निर्देशों को डीओपीटी ने 1985 में संशोधित किया था ताकि उस खंड में बदलाव किया जा सके जो नौकरी में गर्भवती महिला कर्मचारी को शामिल करने पर रोक लगाता था।

इंडियन बैंक ने आयोग को सूचित किया कि "पात्रता पर किसी भी अस्पष्टता" को दूर करने के लिए वह अपने "फिटनेस प्रारूप" को संशोधित कर रहा है। इसके तहत महिलाओं के गर्भवती होने की स्थिति, गर्भाशय समेत अन्य बीमारी का इतिहास पूछा जाएगा।

आयोग ने कहा, “ जाहिर है, संशोधित प्रारूप भी महिलाओं के साथ भेदभाव करता है क्योंकि इसमें महिला-से संबंधित बीमारियों का विवरण मांगा गया है जबकि पुरुष से संबंधित बीमारियों का कोई उल्लेख नहीं है।”

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)